कहने को ‘राजधानी’: रेलवे स्टेशन पर रेल यात्रियों की अग्निपरीक्षा; टिकट के लिए तपती धूप में 100 मीटर की दौड़, जानें क्या है वजह?…NV News

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NV News – रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी का रायपुर रेलवे स्टेशन इन दिनों यात्रियों के लिए किसी ‘सजा’ से कम साबित नहीं हो रहा है। एक तरफ पारा 42 डिग्री के पार पहुँच चुका है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे के अव्यवस्थित इंतजामों ने यात्रियों को तपती धूप में 100 मीटर तक दौड़ने पर मजबूर कर दिया है। कहने को तो यह प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन है, लेकिन टिकट की एक पर्ची के लिए मुसाफिर पसीने से तर-बतर होने को विवश हैं।

क्यों मची है अफरा-तफरी?

​स्टेशन पर इस मुसीबत की मुख्य वजह रेल प्रशासन द्वारा किया गया टिकट काउंटरों का स्थानांतरण (Shifting) और आधुनिक मशीनों का खराब होना है।

  • 100 मीटर की दौड़: स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित कुछ काउंटरों को हटाकर काफी दूर शिफ्ट कर दिया गया है। यात्री जब एक तरफ लाइन में लगते हैं, तो पता चलता है कि वह काउंटर बंद है या वहां विशेष टिकट नहीं मिल रहे, जिसके बाद उन्हें दूसरी तरफ भागना पड़ता है।
  • मशीनें पड़ी हैं ठप: स्टेशन पर लगी ATVM (ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन) में से अधिकांश या तो खराब हैं या उनमें ‘नो सिग्नल’ का बोर्ड लटका है। इसके कारण जो यात्री खुद टिकट निकालना चाहते हैं, उन्हें भी लंबी लाइनों का हिस्सा बनना पड़ रहा है।
  • पार्किंग और प्लेटफार्म के बीच फंसा यात्री: टिकट काउंटर और प्लेटफार्म के बीच की बढ़ती दूरी बुजुर्गों, महिलाओं और भारी सामान वाले यात्रियों के लिए आफत बन गई है।

धूप और लू का सितम

​अप्रैल की इस झुलसाने वाली गर्मी में स्टेशन परिसर के बाहर शेड (छाया) की कमी है। टिकट लेने के लिए कतारों में खड़े यात्रियों के पास पीने के ठंडे पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।

​”एक टिकट के लिए हमें आधा घंटा लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है, ऊपर से काउंटर इतनी दूर कर दिए गए हैं कि ट्रेन छूटने का डर बना रहता है।” — एक परेशान यात्री

 

रेलवे का पक्ष और दावों की हकीकत

​रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन के पुनर्विकास (Redevelopment) का कार्य चल रहा है, जिसके कारण कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से बदला गया है। हालांकि, यात्रियों का सवाल है कि क्या विकास के नाम पर उन्हें इस भीषण गर्मी में बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा जाएगा?

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