युवक की संदेहास्पद मौत पर पुलिस घिरी: बहन ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार; मैनपुर थाना प्रभारी पर एफआईआर नहीं लिखने का आरोप…NV News
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गरियाबंद, 5 जुलाई 2026। जिला गरियाबंद के मैनपुर थाना क्षेत्र में एक युवक की संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब बेहद गरमा गया है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मृतक आकाश कश्यप की बहन आकांक्षा कश्यप ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) गरियाबंद को एक विस्तृत और कड़ा शिकायती आवेदन सौंपा है। आकांक्षा का सीधा आरोप है कि मैनपुर पुलिस ने संज्ञेय अपराध की लिखित सूचना देने के बावजूद अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है।

परिजनों ने मामले की किसी वरिष्ठ अधिकारी से उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(4) के तहत तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने और पीड़ित परिवार को वापस लौटाने वाले मैनपुर थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त विभागीय व वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
जानलेवा हमले के बाद अस्पताल में तोड़ा दम
एसपी को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, यह विवाद 29 जून 2026 की रात से शुरू हुआ। आरोप है कि उस रात आकाश कश्यप के ऊपर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला किया था, जिसमें उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी। गंभीर हालत में आकाश को गरियाबंद के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, जहां जिंदगी और मौत से लड़ते हुए बीते 1 जुलाई 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का कहना है कि आकाश अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंध रखता था। इस बर्बर घटना और मौत के बाद पूरे इलाके के एससी/एसटी समुदाय में भारी आक्रोश है और वर्ग विशेष की सुरक्षा व पुलिस की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
“अभी एफआईआर दर्ज नहीं होगी” कहकर भगाने का आरोप
कानूनी अधिकारों का हनन: मृतक के परिजनों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद जब वे न्याय की उम्मीद लेकर मैनपुर थाना पहुंचे थे, तो वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने संज्ञेय अपराध की सूचना को नजरअंदाज कर दिया। परिजनों ने जब एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया, तो पुलिस ने कथित रूप से यह कहकर उन्हें वापस भेज दिया कि “अभी एफआईआर दर्ज नहीं होगी।”
आकांक्षा कश्यप ने अपने आवेदन में नए कानून का हवाला देते हुए स्पष्ट उल्लेख किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य वैधानिक दायित्व है। इसके बावजूद मैनपुर पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। वहीं धारा 173(4) पीड़ित पक्ष को सीधे जिला पुलिस अधीक्षक के पास आवेदन देकर न्याय पाने का अधिकार देती है, जिसके तहत यह शिकायत दर्ज कराई गई है।
न्याय की आस में एसपी दर पर पहुंचा परिवार
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मैनपुर पुलिस की इस घोर लापरवाही के कारण समय पर साक्ष्य (Evidence) एकत्र नहीं हो सके, जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित हुई है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि:
तत्काल प्रभाव से हत्या या संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की जाए।
मामले से जुड़े सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।
इस संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार के अनुसूचित जाति से होने के कारण पुलिस पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। अब पूरे जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गरियाबंद एसपी इस गंभीर शिकायत पर क्या एक्शन लेते हैं और मैनपुर पुलिस की इस कथित लापरवाही पर क्या गाज गिरती है।

