बदहाल सड़क को लेकर पामगढ़ में चक्काजाम, 5 दिनों से 8 युवाओं का आमरण अनशन जारी; बंद रहे बाजार…NV News

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NV News जांजगीर-चांपा, 3 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में बुनियादी सुविधाओं की बहाली को लेकर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। पामगढ़ से डोंगाकोहरौद मार्ग की जर्जर और बदहाल स्थिति से त्रस्त ग्रामीणों का आंदोलन अब बेहद उग्र रूप ले चुका है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से भारी संख्या में ग्रामीणों ने पामगढ़ के मुख्य अंबेडकर चौक पर चक्काजाम (Road Blockade) कर दिया है, जिससे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।

इस बड़े आंदोलन की खास बात यह है कि इसकी कमान खुद ग्रामीण महिलाओं ने अपने हाथों में ले रखी है। मोर्चे पर आगे महिलाएं बैठी हैं, जबकि बड़ी संख्या में पुरुष और युवा भी उनका साथ दे रहे हैं।

5 दिनों से आमरण अनशन पर हैं 8 युवा

सड़क की दुर्दशा को लेकर ग्रामीणों का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। इस बदहाल मार्ग को बनवाने के लिए गांव के 8 जांबाज युवक पिछले पांच दिनों से लगातार आमरण अनशन (Hunger Strike) पर बैठे हुए हैं। दिनों-दिन अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए जा रहे मौखिक आश्वासनों से ग्रामीण पूरी तरह असंतुष्ट हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक सड़क निर्माण का काम जमीनी स्तर पर धरातल पर शुरू नहीं हो जाता, तब तक वे चक्काजाम और अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

व्यापारियों ने भी बंद रखीं दुकानें, आंदोलन को दिया पूर्ण समर्थन

ग्रामीणों के इस हक की लड़ाई में अब राजनीति के साथ-साथ स्थानीय समाज का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। पामगढ़ के स्थानीय व्यापारियों और व्यावसायिक संगठनों ने भी इस जन आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया है।

सड़क निर्माण की जायज मांग को जायज ठहराते हुए पामगढ़ के मुख्य बाजार और दुकानें आज बंद रहीं।

व्यापारियों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण न सिर्फ ग्रामीणों को परेशानी होती है, बल्कि धूल और गड्ढों की वजह से स्थानीय व्यापार पर भी इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है।

यातायात ठप, मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अमला तैनात

अंबेडकर चौक पर चक्काजाम की वजह से मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने और ग्रामीणों को समझाने के लिए पुलिस प्रशासन और स्थानीय राजस्व विभाग (तहसीलदार/एसडीएम) की टीम मौके पर मौजूद है। हालांकि, ग्रामीण इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और किसी भी तरह के ‘कागजी आश्वासन’ को मानने से साफ इंकार कर रहे हैं।

ग्रामीणों की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अनशन पर बैठे युवाओं के स्वास्थ्य को कुछ भी नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण विभाग की होगी।

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