हसदेव क्षेत्र में राखड़ बांध टूटने से बिजली उत्पादन प्रभावित, कई यूनिट ठप, बढ़ती मांग के बीच संकट गहराया…NV News

Share this

कोरबा के हसदेव क्षेत्र में राखड़ बांध (ऐश डाइक) का बांध टूटना एक बड़ी तकनीकी और पर्यावरणीय आपदा बनकर सामने आया है। इस अप्रत्याशित घटना के कारण क्षेत्र में बिजली उत्पादन प्रक्रिया बुरी तरह बाधित हुई है, जिससे संयंत्रों की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ा है। राखड़ के फैलाव और सुरक्षा संबंधी खामियों के चलते कई महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा है, जिसके कारण बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

बांध टूटने के बाद मलबे और राखड़ के जमाव से बिजली संयंत्रों की आंतरिक परिचालन व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। कई बिजली उत्पादन इकाइयों के ठप होने से राज्य ग्रिड को मिलने वाली आपूर्ति में बड़ी कमी आई है। विशेषज्ञ इस घटना को बड़ी तकनीकी लापरवाही मान रहे हैं, क्योंकि इससे न केवल संयंत्रों की मशीनरी को नुकसान पहुंचा है, बल्कि बिजली उत्पादन की रफ्तार भी धीमी हो गई है, जिससे राज्य की बिजली आपूर्ति श्रृंखला के चरमराने का खतरा बढ़ गया है।

एक ओर बिजली उत्पादन का स्तर नीचे गिरा है, तो दूसरी ओर भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे समय में जब उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली की सबसे अधिक आवश्यकता है, इस संकट ने हालात को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कोरबा जैसे बड़े औद्योगिक हब में बिजली की कमी का सीधा असर न केवल घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय उद्योगों के संचालन पर भी गहरा संकट मंडराने लगा है, जिससे आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका है।

प्रबंधन और संबंधित प्रशासन अब प्रभावित इकाइयों को जल्द से जल्द बहाल करने की कवायद में जुटा है, लेकिन मरम्मत कार्यों में लगने वाला समय एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। राखड़ प्रबंधन में हुई इस बड़ी चूक ने पर्यावरणीय सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में बिजली की बढ़ती मांग और उत्पादन में आई भारी कमी के बीच, अधिकारियों के लिए स्थिति को संभालना एक कठिन परीक्षा बन गया है, जिससे आने वाले कुछ दिनों तक बिजली कटौती की स्थिति बने रहने की संभावना है।

Share this

You may have missed