‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान: बारिश के साथ लबालब भरे तालाब और डबरियां, जल संरक्षण को मिलेगी नई रफ्तार…NV News

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NV News – छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के साथ ही ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक और दूरगामी परिणाम ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से राज्य में हो रही अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से भर रही हैं। इस पहल से न केवल ग्रामीण इलाकों में जल की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि कृषि, भू-जल पुनर्भरण और आजीविका गतिविधियों को भी एक नई मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेश में निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं, जबकि ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत विकसित 700 से अधिक सामुदायिक तालाब भी पानी से लबालब भर चुके हैं। इन जल संरचनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को मत्स्य पालन, सिंचाई और बागवानी जैसी आयवर्धक गतिविधियों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही, राज्य सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के तहत स्वीकृत 318 कार्यों में से 108 कार्य सीधे तौर पर जल संवर्धन के लिए संचालित कर रही है।

‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान के शुभारंभ के बाद से प्रदेश में एक लाख से अधिक जल संरक्षण संबंधी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिस पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य इन संरचनाओं को ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। मानसून की शुरुआत में ही इन ढांचों में जलभराव होना यह साबित करता है कि यह अभियान जल सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार, कृषि और ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान करने में पूरी तरह सफल रहा है।

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