खदान शुरू ही नहीं हुई और कागजों में उड़ गया 2.75 लाख टन लौह अयस्क! पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने खोला बैलाडीला का ‘महाघोटाला’…NV News

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जगदलपुर/दंतेवाड़ा, 2 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध बैलाडीला (Bailadila) लौह अयस्क क्षेत्र में एक बार फिर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और ‘पेपर माइनिंग’ (कागजों पर खनन) का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता और पूर्व विधायक श्री मनीष कुंजाम ने स्थानीय प्रशासन और खनन में लगी एक निजी कंपनी की मिलीभगत पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कुंजाम के इन आरोपों के बाद पूरे प्रशासनिक अमले और खनन जगत में हड़कंप मच गया है।

पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए एक बड़ा और सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि बैलाडीला क्षेत्र की जिस खदान को लेकर यह पूरा विवाद है, वहां जमीनी स्तर पर अब तक वास्तविक रूप से खनन का कार्य शुरू ही नहीं हुआ है। लेकिन सरकारी अभिलेखों और फाइलों में एक बड़ा ‘जादू’ कर दिया गया है।

कागजों में हुआ 2.75 लाख टन के परिवहन का खेल

कुंजाम के मुताबिक, खदान में एक भी मशीन या मजदूर के उतरे बिना ही सरकारी रिकॉर्ड में यह दर्ज कर लिया गया है कि वहां से लगभग 2 लाख 75 हजार टन लौह अयस्क (Iron Ore) का न केवल उत्खनन किया जा चुका है, बल्कि उसका परिवहन (Transportation) भी हो चुका है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी साजिश और एक बड़े सिंडिकेट के तहत किया जा रहा है, जिसमें संबंधित निजी कंपनी के साथ-साथ खनिज और प्रशासनिक विभाग के आला अधिकारी भी शामिल हैं। यह सीधे तौर पर राज्य के राजस्व और प्राकृतिक संपदा की खुली लूट का मामला है।

निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो होगा उग्र जनआंदोलन

आदिवासी नेता ने इस ‘कागजी घोटाले’ पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि:

“बस्तर के जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ हमारी खनिज संपदा को निजी कंपनियों के हाथों इस तरह लुटने नहीं दिया जाएगा। यदि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच नहीं की और इसमें संलिप्त अधिकारियों व कंपनी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो बस्तर का आदिवासी समाज सड़कों पर उतरेगा।”

मनीष कुंजाम ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई न होने की स्थिति में पूरे बैलाडीला और बस्तर संभाग में एक व्यापक और उग्र जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और राज्य सरकार की होगी। इस खुलासे के बाद अब सभी की निगाहें राज्य के खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन के स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं।

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