छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी भी होगी फैमिली पेंशन की हकदार….NV News

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NV News बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court) ने पारिवारिक पेंशन (Family Pension) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहली पत्नी के जीवित रहते हुए किया गया दूसरा विवाह भले ही हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कानूनी रूप से वैध न माना जाए, लेकिन इसके आधार पर दूसरी पत्नी को उसके पेंशन के अधिकार से स्वतः या पूरी तरह से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 मूल रूप से सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कल्याणकारी प्रावधान हैं। ऐसे में इन नियमों की व्याख्या किसी भी नागरिक के अधिकार छीनने के बजाय बेहद उदारतापूर्वक की जानी चाहिए, ताकि आश्रित महिला को जीवन यापन में मदद मिल सके।

पहली पत्नी की मृत्यु के बाद बदल जाती है स्थिति

अदालत ने अपने फैसले में कानून और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलन को स्पष्ट करते हुए कुछ बेहद अहम बिंदु रेखांकित किए:

वैधता बनाम सामाजिक सुरक्षा: अदालत ने माना कि भले ही पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह अवैध माना जाता है, लेकिन यदि पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी है, तो दूसरी पत्नी को असहाय नहीं छोड़ा जा सकता।

उदारतापूर्वक व्याख्या: पेंशन नियम सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनाए गए हैं, इसलिए तकनीकी खामियों के आधार पर किसी आश्रित को आर्थिक संकट में नहीं धकेला जा सकता।

याचिकाकर्ता के पक्ष में आया फैसला, आश्रितों को बड़ी राहत

उच्च न्यायालय का यह फैसला उन महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है जो पति के निधन के बाद पेंशन के लिए विभागों के चक्कर काट रही थीं। कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि कानूनी अड़चनों को दरकिनार कर, पहली पत्नी के निधन की स्थिति में दूसरी पत्नी के पारिवारिक पेंशन के दावों का निपटारा जल्द से जल्द किया जाए। इस फैसले से प्रदेश के पेंशन नियमों के क्रियान्वयन में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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