चिंतन शिविर 3.0 से खींची गई विकसित छत्तीसगढ़ की रूपरेखा: सीएम विष्णुदेव साय बोले— “धरातल पर दिख रहे नतीजे, सुशासन से बदलेगी राज्य की तस्वीर”….NV News

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NV News रायपुर, 5 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक एक विकसित और सुशासित राज्य बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को लेकर नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। सुशासन एवं अभिसरण विभाग और आईआईएम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उच्च स्तरीय शिविर के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल गपशप या विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में ठोस और बड़े सुधारों का एक प्रभावी जरिया बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों से मिले सुझावों को सरकार ने केवल कागजों पर नहीं रखा, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारा है। इसी का नतीजा है कि आज मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली से फाइलें तेजी से निपट रही हैं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 से जनता की शिकायतों का तुरंत निपटारा हो रहा है और सेवा सेतु के जरिए 36 विभागों की 520 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन जनता के मोबाइल तक पहुंच चुकी हैं।

शिविर के दूसरे दिन इन 2 बड़े विषयों पर हुआ नीतिगत मंथन

चिंतन शिविर के दूसरे और अंतिम दिन देश के जाने-माने विषय विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां दीं:

1. हाई-वैल्यू और लो-इम्पैक्ट टूरिज्म का केंद्र बनेगा बस्तर

पर्यटन नीति विशेषज्ञ और केंद्रीय अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला ने ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ सत्र में कहा कि छत्तीसगढ़ में देश का अग्रणी पर्यटन गंतव्य (Tourism Destination) बनने की असीम क्षमता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर तालमेल से बस्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दी जाएगी। राज्य की नई औद्योगिक नीति भी पर्यटन के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी।

2. अब हर जिले की होगी अपनी ‘डिस्ट्रिक्ट जीडीपी’

‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर बोलते हुए लोकसभा सदस्य शशांक मणि त्रिपाठी ने एक बेहद अनूठा मॉडल पेश किया। उन्होंने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि देश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले के लिए सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन (Planning) होना चाहिए। यह मॉडल टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थानीय स्तर पर नए स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

पहले दिन की बड़ी बातें: एआई (AI), ड्रोन और गौर गोपाल दास का मंत्र

दो दिवसीय शिविर के पहले दिन भी कई महत्वपूर्ण नीतिगत सत्र आयोजित किए गए थे, जो आगामी प्रशासनिक सुधारों का आधार बनेंगे:

संवेदनशील नेतृत्व: प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों को भावनात्मक संतुलन और मूल्य-आधारित जनसेवा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संवेदनशीलता ही सुशासन की असली रीढ़ है।

गवर्नेंस में एआई और ड्रोन तकनीक: नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन और ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी व नागरिक-केंद्रित बनाने का रोडमैप रखा।

क्लाइमेट फ्रेंडली खेती: कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती (Natural Farming) और फसलों के विविधीकरण (Crop Diversification) पर व्यावहारिक सुझाव दिए।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मील का पत्थर

समापन सत्र के दौरान डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने लोक प्रशासन और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन पर अपने विचार साझा किए। पूरे दो दिनों तक चले इस मंथन में साय मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों ने अलग-अलग समूहों (Groups) में बैठकर राज्य की चुनौतियों और उनके समाधानों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भरोसा दिलाया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सभी बहुमूल्य सुझावों को कैबिनेट स्तर पर लाकर जल्द ही नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा, जो ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के तहत छत्तीसगढ़ के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।

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