अदालत: बिखरते रिश्तों के लिए ‘संजीवनी’ बनी अदालत, पति ने खाई शराब छोड़ने की कसम, तो फिर खिल उठे घर-संसार…NV News
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NV News- बिलासपुर के कुटुंब न्यायालय में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत केवल फाइलों के निपटारे का जरिया नहीं बनी, बल्कि यह कई टूटते हुए परिवारों के लिए नई शुरुआत साबित हुई। यहाँ कानूनी दलीलों की जगह जजों की ‘समझाइश’ ने रिश्तों की डोर को फिर से मजबूत कर दिया। लोक अदालत के दौरान कुल 119 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा भावुक पल पति-पत्नी के पुनर्मिलन के रहे।
प्रधान न्यायाधीश आलोक कुमार की खंडपीठ में एक ऐसा मामला आया, जहां एक दंपती पिछले दो वर्षों से विवाद के कारण अलग रह रहे थे। विवाद की मुख्य जड़ पति की शराब की लत थी। सुनवाई के दौरान जज और काउंसलर्स ने जब दोनों को भविष्य और परिवार की अहमियत समझाई, तो पति का दिल पिघल गया। उसने भरी अदालत में वचन दिया कि वह अब कभी शराब नहीं पिएगा और नशा मुक्ति केंद्र में अपना उपचार कराएगा। पति के इस वादे पर भरोसा कर पत्नी ने उसका हाथ थाम लिया और साथ घर जाने को राजी हो गई।
खंडपीठों का प्रदर्शन:
प्रधान न्यायाधीश आलोक कुमार: 70 मामलों का निराकरण।
प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार पात्रे: 23 मामलों का निपटारा।
द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश स्वर्णलता टोप्पो: 26 मामलों का निराकरण।
इस सफलता में सदस्य अब्दुल सलीम कुरैशी, प्रशांत गनोरकर सहित अन्य न्यायिक कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। लोक अदालत ने यह साबित कर दिया कि अदालतों का मकसद सिर्फ सजा सुनाना नहीं, बल्कि बिखरते हुए आशियानों को फिर से सजाना भी है।

