छत्तीसगढ़ में गहराया कुपोषण का संकट: सर्वे में सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा, करीब 2 हजार बच्चे गंभीर कुपोषण की चपेट में…NV News

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NV News- Raipur छत्तीसगढ़ के बच्चों की सेहत और पोषण स्तर को लेकर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज बच्चों के स्वास्थ्य और वजन की जांच के लिए आयोजित विशेष सर्वे व ‘वजन त्योहार’ के आंकड़ों से पता चला है कि राज्य में करीब 2,000 बच्चे गंभीर कुपोषण (Severe Acute Malnutrition – SAM) का शिकार हैं। इसके साथ ही, लगभग 15 से 17 हजार बच्चों की सेहत बेहद कमजोर पाई गई है, जिन्हें मध्यम कुपोषण (MAM) की श्रेणी में रखा गया है। यह आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि तमाम सरकारी योजनाओं और जमीनी दावों के बावजूद राज्य के सुदूर और शहरी दोनों क्षेत्रों के गरीब परिवारों तक जरूरी पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही हैं।

आंकड़ों की गहराई में जाएं तो यह समस्या समय के साथ बेहद धीमी रफ्तार से सुधर रही है। साल 2023 में राज्य के प्रभावित इलाकों में जहां 20,600 मध्यम कुपोषित और 3,662 गंभीर कुपोषित बच्चे दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या मामूली रूप से घटकर क्रमशः 20,185 और 3,081 रह गई। वर्ष 2025 तक स्थिति में कुछ और सुधार दिखा, जिसमें मध्यम कुपोषितों का आंकड़ा 17,613 और गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 2,651 तक पहुंची। लेकिन वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि धरसींवा, आरंग, मंदिर हसौद समेत राजधानी रायपुर और उसके आसपास के ब्लॉक और ग्रामीण अंचलों में अभी भी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। जमीनी स्तर पर काम करने वाली एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार, उनके अकेले के क्षेत्र में ही दर्जनों बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में दर्ज हैं।

इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशासनिक तत्परता और पोषण अभियानों को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मानें तो जागरूकता की कमी, स्थानीय स्तर पर संतुलित आहार की अनुपलब्धता और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की सुस्त रफ्तार इस कुपोषण चक्र को बढ़ावा दे रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग को अब केवल कागजी आंकड़ों को सुधारने के बजाय प्रभावित इलाकों में पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) की संख्या बढ़ाने, गर्भवती महिलाओं व शिशुओं को टेक-होम राशन का नियमित वितरण सुनिश्चित करने और सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम को और आक्रामक तरीके से लागू करने की जरूरत है।

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