विश्व प्रवासी पक्षी दिवस: सात समंदर पार से छत्तीसगढ़ आते हैं विदेशी मेहमान, पर्यावरण संतुलन में निभाते हैं अहम भूमिका…NV News
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NV News Raipur- हर साल मई और अक्टूबर के दूसरे शनिवार को “विश्व प्रवासी पक्षी दिवस” मनाया जाता है। इस वर्ष 9 मई 2026 को यह विशेष दिन प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने के संदेश के साथ मनाया जा रहा है। इस वैश्विक पहल की शुरुआत वर्ष 2006 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को इन पक्षियों की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा तथा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में उनके महत्व के प्रति जागरूक करना है।
छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक परिवेश और यहां के जलाशय हर साल सर्दियों के मौसम में हजारों विदेशी मेहमानों के लिए पनाहगाह बनते हैं। रूस, साइबेरिया, मंगोलिया और यूरोप के ठंडे प्रदेशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर ये पक्षी छत्तीसगढ़ के विभिन्न वेटलैंड्स और जलाशयों में पहुंचते हैं। खैरागढ़, राजिम, धमतरी और बिलासपुर के आसपास के तालाब इन दिनों चहचहाहट से गुलजार रहते हैं, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्रवासी पक्षी न केवल जैव विविधता को समृद्ध करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पक्षी कीटों के नियंत्रण और बीजों के प्रसार में सहायक होते हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के कारण इनके प्रवास मार्ग और ठहरने के स्थानों पर संकट मंडरा रहा है। विश्व प्रवासी पक्षी दिवस हमें याद दिलाता है कि इन परिंदों को सुरक्षित वातावरण देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
छत्तीसगढ़ सरकार और वन विभाग द्वारा इन पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जलाशयों के पास मानवीय हस्तक्षेप को कम करने और उनके भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जब हम इन नन्हें मेहमानों के संरक्षण की बात करते हैं, तो वास्तव में हम अपने भविष्य और आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण सुरक्षित कर रहे होते हैं।

