Social Issues:- धर्मांतरण के खिलाफ 26 गांवों की संयुक्त ग्राम सभा का बड़ा फैसला: चर्च और प्रार्थना सभाओं पर लगाया प्रतिबंध…NV News
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NV News- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में कथित तौर पर बढ़ रहे धर्मांतरण (मतांतरण) के मामलों को लेकर स्थानीय जनजातीय समाज और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। कांकेर जिले के पीढ़ापाल अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 26 गांवों की पारंपरिक ग्राम सभाओं ने एकजुट होकर एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। क्षेत्र में कथित रूप से सुनियोजित और षड्यंत्रपूर्वक कराए जा रहे मतांतरण के विरोध में शनिवार 14 जून को ग्राम मुरागांव में एक विशाल रूढ़िगत पारंपरिक संयुक्त ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से कई कड़े प्रतिबंधात्मक प्रस्ताव पारित किए गए।
इस महापंचायतनुमा संयुक्त ग्राम सभा में आदिवासी समाज के प्रमुखों, प्रबुद्ध नागरिकों और हजारों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बैठक में गहन मंथन के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अनुसूचित क्षेत्र के इन 26 गांवों की सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार के नए ईसाई चर्च के निर्माण, अनधिकृत प्रार्थना सभाओं के आयोजन और बाहरी पादरियों के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि चंगाई सभाओं और अन्य प्रलोभनों के माध्यम से सीधे-साधे ग्रामीणों की आस्था और उनकी प्राचीन संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संयुक्त ग्राम सभा के मंच से समाज प्रमुखों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि बस्तर संभाग के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में चल रहे अवैध मतांतरण के खेल पर तत्काल प्रभावी रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, प्रस्ताव में यह भी चेतावनी दी गई है कि जो लोग अपनी मूल संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों को छोड़कर दूसरा धर्म अपना चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) को मिलने वाले संवैधानिक लाभों और आरक्षण की श्रेणी से बाहर (डी-लिस्ट) किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि संस्कृति बदलने से प्रकृति और पहचान बदलती है, इसलिए परंपराओं का संरक्षण बेहद जरूरी है।
कांकेर जिले के मुरागांव में हुई इस बड़ी सामाजिक और पारंपरिक बैठक के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमा भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। इस संवेदनशील फैसले के बाद अंदरूनी इलाकों में सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा कड़े सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, 26 गांवों के ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी रूढ़िगत शक्तियों और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए अपने गांवों की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए मैदानी स्तर पर पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे।

