Bastar Fisheries Success Story: मल्हनिया जलाशय में केज कल्चर से बैगा मछुआरों की आजीविका को मिला नया सहारा…NV News

Share this

NV News रायपुर। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आधुनिक मत्स्यपालन तकनीकों को बढ़ावा देने का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। योजना के माध्यम से अंतर्देशीय मत्स्यपालन, केज कल्चर और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर मछुआरों एवं मछली किसानों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

मल्हनिया जलाशय में केज कल्चर से बढ़े अवसर

मल्हनिया जलाशय में केज कल्चर के जरिए बैगा समुदाय से जुड़े मछुआरों को मत्स्यपालन के आधुनिक तरीके से जोड़ा गया है। जलाशय में पिंजरा आधारित मत्स्यपालन से स्थानीय मछुआरों को अपनी पारंपरिक आजीविका के साथ आधुनिक तकनीक का लाभ लेने का अवसर मिल रहा है।

केज कल्चर में जलाशय या अन्य बड़े जलस्रोत में विशेष जालीनुमा पिंजरों के भीतर मछलियों का पालन किया जाता है। इस तकनीक के जरिए सीमित क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन को व्यवस्थित तरीके से बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहे मछुआरे

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में अधोसंरचना और तकनीकी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका को बेहतर बनाना है। मल्हनिया जलाशय में केज कल्चर से जुड़े बैगा समुदाय के मछुआरों को भी आधुनिक मत्स्यपालन से नए आर्थिक अवसर मिल रहे हैं।

योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, मत्स्य उत्पादन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पारंपरिक रूप से मत्स्यपालन से जुड़े समुदायों को अपनी आजीविका को अधिक व्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है।

Share this