Bastar Education Story: जावंगा एजुकेशन सिटी से जनजातीय बच्चों ने गढ़ी सफलता की नई कहानी…NV News

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Bastar Education Story, 29 सितंबर 2026। दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी ने जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास के नए अवसर तैयार किए हैं। कभी दूरस्थ गांवों में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रहने वाले बच्चे आज नीट-यूजी पास कर चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, आईआईटी-एनआईटी जैसे संस्थानों तक पहुंच रहे हैं और देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार हासिल कर रहे हैं।

150 एकड़ में तैयार हुआ शिक्षा का बड़ा परिसर

करीब 150 एकड़ में फैली एजुकेशन सिटी में स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े 43 शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थान संचालित हैं। यहां करीब 7,436 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। लगभग 5,370 विद्यार्थी परिसर के छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के गांवों और जंगल क्षेत्रों से आने वाले बच्चों को आवास, भोजन, शिक्षा और मार्गदर्शन की सुविधाएं एक ही परिसर में मिलती हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यहां स्कूल ड्रॉप-आउट दर 50 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत रह गई है।

बालिका शिक्षा के क्षेत्र में भी जावंगा ने कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। ‘छू लो आसमान’ कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की छात्राओं ने नीट-यूजी में सफलता हासिल की है। सफल विद्यार्थियों को शासकीय संस्थानों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिला है। यह बदलाव उन परिवारों के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां बेटियों की उच्च शिक्षा पहले आसान नहीं थी।

डिजिटल शिक्षा से रोजगार तक पहुंच

जावंगा का नवगुरुकुल युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशल से जोड़ने का काम कर रहा है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करीब 100 युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार हासिल कर चुके हैं। नवगुरुकुल की एक छात्रा का चयन S&P Global में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। वहीं आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थियों में करीब 95 प्रतिशत जनजातीय समुदाय से हैं।

खेलों में भी तैयार हो रही नई प्रतिभा

शिक्षा के साथ खेलों को भी जावंगा मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। एकलव्य खेल परिसर में स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ‘खेलो इंडिया’ से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे खेल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। खेल गतिविधियों के जरिए बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

बेटियों और हिंसा प्रभावित बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल

जावंगा एजुकेशन सिटी में बालिका शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल रहा है। स्वामी आत्मानंद स्कूल में करीब 1,200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य विषयों की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। आवास, भोजन, पुस्तकालय और प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं से दूरस्थ इलाकों के परिवारों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है।

दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे क्षेत्रों के अनाथ तथा हिंसा प्रभावित बच्चों के लिए आस्था विद्या मंदिर भी सहारा बना है। यहां बच्चों को उनकी परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश दिया जाता है। शिक्षा के साथ उन्हें आवास, खेल, संगीत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों से निकलकर आगे की जिंदगी के लिए नए अवसर हासिल कर सकें।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

जावंगा एजुकेशन सिटी की पहल को KPMG द्वारा दुनिया की 100 नवोन्मेषी परियोजनाओं में शामिल किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसमें भारत से छह परियोजनाओं का चयन बताया गया है। दंतेवाड़ा प्रशासन को इस पहल के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मई 2015 को जावंगा एजुकेशन सिटी का दौरा कर विद्यार्थियों से संवाद किया था। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी यहां का दौरा कर चुके हैं।

जावंगा एजुकेशन सिटी की कहानी यह दिखाती है कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों के बच्चों को यदि शिक्षा, आवास, कौशल प्रशिक्षण, खेल और मार्गदर्शन का समुचित वातावरण मिले, तो वे उच्च शिक्षा और रोजगार के राष्ट्रीय अवसरों तक पहुंच सकते हैं। आज यह परिसर बस्तर के अनेक जनजातीय बच्चों के लिए आगे बढ़ने की संभावनाओं का केंद्र बना हुआ है।

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