बढ़ा मान: डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री; सीएम साय ने कहा – यह निःस्वार्थ सेवा का राष्ट्रीय सम्मान…NV News

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NV News- छत्तीसगढ़ के बस्तर के सुदूर और दुर्गम जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल पेश करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में गोडबोले दंपति को यह सम्मान प्रदान किया गया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव, सम्मान और प्रेरणा का विषय बताया है।

वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर बस्तर को बनाया कर्मभूमि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोडबोले दंपति के जीवन संघर्ष और उनकी अद्वितीय सेवाओं को याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया:

जीवन जनजातीय समाज को समर्पित: गोडबोले दंपति ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना पूरा जीवन सुदूर वनांचल के जनजातीय समाज की सेवा और उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।

दुर्गम बारसूर में जगाई स्वास्थ्य की अलख: बस्तर के अत्यंत दूरस्थ, संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्र बारसूर में रहकर उन्होंने उस दौर में स्वास्थ्य सेवाओं की अलख जगाई, जब वहां बुनियादी सुविधाओं का नितांत अभाव था।

निःशुल्क इलाज और जागरूकता: उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों तक न केवल निःशुल्क (फ्री) इलाज पहुंचाया, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और जनविश्वास का एक नया प्रकाश बिखेरा।

कुपोषण मुक्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अतुलनीय योगदान

डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले का कार्य केवल क्लिनिक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बस्तर के सामाजिक और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में जमीनी स्तर पर काम किया:

मुख्यमंत्री साय का संदेश: “राष्ट्रपति महोदया द्वारा गोडबोले दंपति को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना जनसेवा, अटूट समर्पण और संवेदनशीलता के उन मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है, जो राष्ट्र निर्माण का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण हैं। इस दंपति ने कुपोषण मुक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ उपलब्धता और ग्रामीण-जनजातीय समाज के जीवन स्तर को सुधारने में जो अद्वितीय योगदान दिया है, वह हम सभी के लिए अनुकरणीय है।”

गोडबोले दंपति को मिला यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान न केवल बस्तर के वनांचलों में किए गए उनके मौन साधक जैसे कार्यों का प्रतिफल है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सेवा परंपरा को भी वैश्विक पटल पर गौरवान्वित करता है।

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