डिजिटल पहरा: छत्तीसगढ़ में कचरा छिपाने वालों की अब खैर नहीं, 1.15 लाख संस्थानों की होगी जियो-टैगिंग…NV News
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NV News रायपुर, 30 जून 2026। छत्तीसगढ़ में अब बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले (बल्क वेस्ट जनरेटर) संस्थानों पर शासन-प्रशासन की डिजिटल नजर रहेगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के कड़े निर्देशों के बाद राज्य के नगरीय निकाय ऐसे सभी संस्थानों की जियो-टैगिंग करने की तैयारी में युद्ध स्तर पर जुट गए हैं। इस नई तकनीक-आधारित व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रदेश के करीब 1.15 लाख बड़े संस्थान, होटल, मॉल, अस्पताल, बस स्टैंड, बड़ी आवासीय कॉलोनियां और सरकारी कार्यालय अब कचरा छिपा नहीं सकेंगे। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य कचरा प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और शहरों को स्वच्छ बनाना है।
इस नई योजना के तहत उन सभी संस्थानों को चिन्हित कर जियो-टैग किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक ठोस कचरा (सॉलिड वेस्ट) पैदा होता है। जियो-टैगिंग होने से इन संस्थानों की लोकेशन और वहां से निकलने वाले कचरे के निष्पादन की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार बड़े संस्थान कचरे का सही तरीके से निपटान करने के बजाय उसे छुपाने या खुले में डंप करने की कोशिश करते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। अब डिजिटल मैपिंग के जरिए ऐसी गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम कसी जा सकेगी।
नगरीय प्रशासन विभाग इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए जल्द ही सभी निकायों में सर्वे शुरू करने जा रहा है। जो संस्थान नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे या कचरे की सही जानकारी छिपाएंगे, उन पर भारी जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस कदम से न केवल छत्तीसगढ़ के शहरों की रैंकिंग ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ में सुधरेगी, बल्कि कचरे के रीसाइक्लिंग और गीले-सूखे कचरे के सही प्रबंधन को एक नई और व्यवस्थित दिशा मिलेगी।

