तिलहन उत्पादन को बढ़ावा: कोटमीकला के 25 किसानों को मिला उन्नत मूंगफली बीज, वैज्ञानिक खेती का मिला प्रशिक्षण…NV News
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NV News रायपुर/जीपीएम: देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक सशक्त पहल की गई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के पेंड्रा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोटमीकला में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन’ (NMEO) के तहत किसानों को उन्नत किस्म के मूंगफली बीज वितरित किए गए हैं। यह कदम किसानों को कम लागत में अधिक और गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त करने में मददगार साबित होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य का कृषि विभाग किसानों तक उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और वैज्ञानिक सलाह समय पर पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। कोटमीकला में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अमित कुमार तंवर, कृषि विकास अधिकारी मधुसूदन और ग्राम पंचायत के सरपंच भंवर सिंह अर्मो की उपस्थिति में 10 हेक्टेयर के प्रदर्शन रकबे के लिए चयनित 25 किसानों को प्रमाणित मूंगफली बीज सौंपे गए।
बीजों के साथ मिला वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान केवल बीज वितरण ही नहीं किया गया, बल्कि कृषि विशेषज्ञों ने उपस्थित किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की बारीकियों से भी अवगत कराया। प्रशिक्षण सत्र में किसानों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई:
बीज उपचार (Seed Treatment): बुआई से पहले बीजों को रोगमुक्त करने के तरीके।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन: मिट्टी की सेहत के अनुसार सही मात्रा में खाद का उपयोग।
फसल सुरक्षा: खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियां।
जल संरक्षण: कम पानी में बेहतर फसल लेने की तकनीक।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रदर्शन आधारित खेती का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित करना है, ताकि आने वाले समय में मूंगफली सहित अन्य तिलहनी फसलों का रकबा और उत्पादकता बढ़ सके।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
कोटमीकला के किसानों ने शासन की इस जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि समय पर उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उनकी खेती अधिक लाभकारी बनेगी। कृषि विभाग ने सभी किसानों से अपील की है कि वे मृदा परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही खेती करें और विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

