Urban Development CG: छत्तीसगढ़ के शहरों में विकास कार्यों को रफ्तार देने की कवायद, सचिव शंगीता आर. ने नोडल अफसरों को दिए सख्त निर्देश, लापरवाही पर कसेगा शिकंजा…NV News

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NV News- Urban Development CG (छत्तीसगढ़ शहरी विकास): छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, जन सुविधाओं का तेजी से विस्तार करने और सरकारी योजनाओं को बिना किसी प्रशासनिक लेती-देती के धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गतिमान बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक कसावट शुरू कर दी गई है। इसी सिलसिले में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर. ने मंत्रालय (महानदी भवन) में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में विशेष रूप से प्रदेश के विभिन्न जिलों और नगरीय निकायों के कार्यों की सघन मॉनिटरिंग व समन्वय के लिए नियुक्त किए गए राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों के कामकाज की गहन समीक्षा की गई। बैठक के दौरान सचिव ने सभी नोडल अधिकारियों को कड़े लहजे में हिदायत दी कि वे अपने-अपने आबंटित नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों और जनसुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की नियमित, सक्रिय और गंभीरता से मॉनिटरिंग करें। उन्होंने साफ कहा कि केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों को आगे बढ़ाने का वक्त अब चला गया है; अधिकारी मैदानी स्तर पर आ रही व्यावहारिक समस्याओं का त्वरित और परमानेंट हल निकालें ताकि विकास की रफ्तार को और तेज किया जा सके।

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव शंगीता आर. ने बैठक में उपस्थित सभी नोडल अधिकारियों से उनके द्वारा किए गए हालिया जिला भ्रमणों, मैदानी निरीक्षणों और स्थानीय स्तर पर ली गई बैठकों का वन-टू-वन लाइव फीडबैक लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से निकायों में चल रहे प्रोजेक्ट्स की वास्तविक जमीनी स्थिति (वस्तुस्थिति) जानी। सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जब भी वे किसी नगरीय निकाय के औचक या नियमित निरीक्षण पर जाएं, तो उनकी तैयारी पूरी तरह से मुस्तैद होनी चाहिए। अधिकारियों को यह अच्छे से पता होना चाहिए कि संबंधित निकाय को विभिन्न निर्माण और जनोपयोगी विकास कार्यों के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान सरकार की तरफ से कितनी राशि (बजट) जारी की गई है और उसमें से कितनी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा हो चुका है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की सभी फ्लैगशिप योजनाओं, विशेष रूप से बुनियादी अधोसंरचना विकास की हर महीने कड़ाई से समीक्षा करने के निर्देश दिए ताकि तय समय-सीमा के भीतर काम पूरे हो सकें।

शहरी विकास की इस नई रणनीति में वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। शंगीता आर. ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने प्रभार वाले जिलों के नगरीय निकायों की आय-व्यय (राजस्व स्थिति) पर बहुत बारीकी से नजर रखें। उन्होंने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बात कहते हुए कहा कि जो नगरीय निकाय अपने खुद के टैक्स कलेक्शन, यूजर चार्ज और आंतरिक स्रोतों की आय से अपनी सभी नागरिक व्यवस्थाएं और छोटे-मोटे विकास कार्य खुद संचालित करने में सक्षम हैं, उन्हें और अधिक प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे राज्य सरकार के अनुदानों पर पूरी तरह निर्भर न रहें। इसके साथ ही, लोक कल्याणकारी योजनाओं को गति देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि हर एक नगरीय निकाय में वार्डवार बकायदा एक निश्चित लक्ष्य (टारगेट) निर्धारित किया जाए और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के काम को युद्ध स्तर पर चलाकर उसे शत-प्रतिशत ‘सेचुरेट’ (पूर्ण) किया जाए, ताकि हर गरीब का अपने पक्के मकान का सपना सच हो सके। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, उप सचिव भागवत जायसवाल, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता राजेश शर्मा सहित तकनीकी विंग के कई आला अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

प्रशासनिक स्तर पर दी गई जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के शहरी विकास की तस्वीर बदलने और योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी को बेहद मजबूत करने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग की यह नोडल अधिकारी प्रणाली काफी कारगर साबित हो रही है। सभी राज्य स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों को बकायदा जिले आवंटित किए गए हैं और उन्हें नियमित रूप से फील्ड पर उतरने के आदेश दिए गए हैं। इसी साल बीते 6 जून को राज्य के इतिहास में पहली बार एक साथ सभी नोडल अधिकारियों ने अपने-अपने आवंटित जिलों में पहुंचकर वहां की वास्तविक चुनौतियों, फंड की उपलब्धता और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का ऑन-स्पॉट असेसमेंट (आकलन) किया था।

विभाग की इस अनूठी और सक्रिय पहल का सबसे बड़ा फायदा यह हो रहा है कि मैदानी स्तर पर ठेकेदारों या स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण जो काम महीनों से रुके हुए थे, उनका ऑन-द-स्पॉट निपटारा हो रहा है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो छत्तीसगढ़ के कुल 194 नगरीय निकायों में से अब तक 103 निकायों का विस्तृत मैदानी निरीक्षण नोडल अधिकारियों द्वारा पूरा किया जा चुका है। बचे हुए निकायों में भी अगले कुछ दिनों के भीतर सघन जांच और निरीक्षण की तैयारी है। सचिव के इस कड़े रुख से पूरे नगरीय प्रशासन महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और यह साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के शहरों में विकास कार्यों की गुणवत्ता और रफ्तार में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलने वाला है।

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