PM Kisan Scheme Impact: जीपीएम के किसान दुर्गेश यादव के लिए आर्थिक ढाल बनी ‘सम्मान निधि’, हर 3 महीने में मिलने वाले ₹2000 से बदला खेती का पूरा ढांचा…NV News

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NV News PM Kisan Yojana Impact (पीएम किसान योजना का प्रभाव): भारत एक कृषि प्रधान देश है और आज भी देश की एक बहुत बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ी समस्या छोटे और सीमांत किसानों के पास निवेश के लिए नगद पैसों की कमी होना है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ आज देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए आर्थिक सहारे का सबसे मजबूत आधार बन चुकी है। इस योजना ने देश के सुदूर क्षेत्रों में बैठे उन किसानों को एक नई संजीवनी दी है, जो पैसों के अभाव में अपनी फसलों की सही देखरेख नहीं कर पाते थे। छत्तीसगढ़ के नवगठित और जनजातीय बहुल जिले गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) के अंतर्गत आने वाले ग्राम बिजरवार के रहने वाले किसान दुर्गेश यादव भी उन्हीं भाग्यशाली और प्रगतिशील लाभार्थियों में शामिल हैं, जिनकी जिंदगी की पूरी तस्वीर इस दूरदर्शी योजना ने बदलकर रख दी है।

किसान दुर्गेश यादव की कहानी छत्तीसगढ़ के लाखों उन छोटे किसानों का प्रतिनिधित्व करती है, जो सीमित कृषि भूमि के बावजूद केवल अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दुर्गेश के पास खेती के लिए जमीन बहुत ज्यादा नहीं है, जिसके कारण उनकी सालाना आय हमेशा सीमित रहती थी। कुछ समय पहले तक उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती थी कि जैसे ही रबी या खरीफ फसलों का सीजन नजदीक आता था, उन्हें बाजार से महंगे दामों पर उन्नत किस्म के बीज, रासायनिक व जैविक खाद (उर्वरक) और फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं की व्यवस्था करनी पड़ती थी। ऐन वक्त पर नगद पैसों की कमी के कारण कई बार उन्हें स्थानीय साहूकारों या बिचौलियों के चक्कर काटने पड़ते थे, जहां उन्हें भारी ब्याज दरों पर कर्ज मिलता था। इस वजह से फसल कटने के बाद भी मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा कर्ज और ब्याज चुकाने में ही चला जाता था और दुर्गेश के हाथ केवल घोर निराशा और आर्थिक मानसिक तनाव ही लगता था।

लेकिन जब से दुर्गेश यादव का नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पंजीकृत हुआ है, तब से उनके जीवन की दिशा और दशा दोनों पूरी तरह बदल गई है। अपनी इस परिवर्तनकारी यात्रा और सफलता का अनुभव साझा करते हुए दुर्गेश यादव बताते हैं कि इस जनकल्याणकारी योजना के अंतर्गत उन्हें प्रत्येक तीन माह में 2,000 रुपये की निश्चित आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में बिना किसी देरी के प्राप्त हो जाती है। यह पूरी प्रक्रिया इतनी पारदर्शी है कि इसमें किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या दलालों की कोई भूमिका नहीं है। केंद्र सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में पैसे भेजती है। दुर्गेश कहते हैं कि समय पर मिलने वाली यह ₹2000 की राशि दिखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन एक सीमांत किसान के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यह पैसा ठीक उसी समय आता है जब फसलों की बुआई या निंदाई-गुड़ाई के लिए पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

दुर्गेश आगे बताते हैं कि पहले कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने या आधुनिक मशीनों का किराया देने में उन्हें बहुत कठिनाई होती थी। पैसों की तंगी के कारण वे पारंपरिक और पुराने ढर्रे से ही खेती करने को मजबूर थे, जिससे श्रम अधिक लगता था और उत्पादन बेहद कम होता था। लेकिन अब योजना से मिलने वाली किश्तों का योजनाबद्ध उपयोग करके वे समय पर उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज और सही मात्रा में खाद खरीद पा रहे हैं। इससे उनकी खेती का पूरा कार्य समय पर और बेहद व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इन उन्नत कृषि इनपुट्स के इस्तेमाल का ही परिणाम है कि अब उनके खेतों की मिट्टी की सेहत सुधर रही है और प्रति एकड़ फसल का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी उन्हें उल्लेखनीय सफलता मिल रही है।

दुर्गेश यादव का यह भी कहना है कि इस क्रांतिकारी योजना का सकारात्मक प्रभाव केवल उन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके पूरे बिजरवार क्षेत्र और आस-पास के अनेक गांवों के सैकड़ों छोटे और सीमांत किसानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। नियमित और सुनिश्चित आर्थिक सहायता मिलने से ग्रामीण अंचल के किसानों के भीतर एक नया आत्मविश्वास जागा है। अब वे कर्ज के डर से मुक्त होकर अपनी खेती के कार्यों को बेहतर योजना, नई तकनीकों और दोगुने उत्साह के साथ कर पा रहे हैं। इस वित्तीय स्थिरता ने न केवल किसानों की व्यक्तिगत आय में वृद्धि की है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती प्रदान की है। जो किसान पहले खेती छोड़ने का मन बना रहे थे, वे अब गर्व से अपनी जमीन पर पसीना बहा रहे हैं।

इस योजना को किसानों के हित में एक अत्यंत लाभकारी और अब तक की सबसे सराहनीय पहल बताते हुए दुर्गेश यादव ने सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को एक ऐसा आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, जो उन्हें आत्मनिर्भर भारत के सपने से सीधे जोड़ता है। योजना के माध्यम से मिलने वाली समयबद्ध सहायता ने खेती को घाटे के सौदे से उबारकर अधिक लाभकारी, सुरक्षित और टिकाऊ बना दिया है। आज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ग्रामीण भारत के लाखों परिवारों की तरह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के किसान दुर्गेश यादव के जीवन में भी नई उम्मीद की किरण, अटूट आत्मविश्वास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार बनकर चमक रही है।

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