Organic Vishnubhog Rice: राजधानी रायपुर तक पहुंची जीपीएम के ‘विष्णुभोग चावल’ की महक, उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भेंट किया गया बिहान दीदियों का खास जैविक उत्पाद…NV News
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NV News- Organic Vishnubhog Rice (जैविक विष्णुभोग चावल): छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां सदियों से धान की ऐसी दुर्लभ और खुशबूदार किस्में उगाई जाती रही हैं, जिनकी महक से पूरा देश सराबोर होता रहा है। इसी समृद्ध कृषि परंपरा को आधुनिक दौर में एक बार फिर वैश्विक और राज्य स्तर पर पहचान दिलाने का बीड़ा छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं ने उठाया है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले की ग्रामीण महिलाओं द्वारा पूरी तरह से प्राकृतिक और पारंपरिक तरीके से तैयार किया जा रहा ‘जैविक विष्णुभोग चावल’ अब अपनी खास खुशबू और लाजवाब स्वाद के दम पर राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका गतिविधियों को एक नया आयाम देने के उद्देश्य से जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात की। इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान उन्होंने उप मुख्यमंत्री को जिले की महिलाओं द्वारा उत्पादित और प्रसंस्कृत किया गया प्रसिद्ध जैविक विष्णुभोग चावल का एक विशेष पैकेट भेंट किया। यह सुगंधित चावल जिले के अरपा बिहान महिला स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के, विशुद्ध जैविक विधि से खेतों में तैयार किया गया है।
इस महत्वपूर्ण मुलाकात और सौगात के अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव को जिले के भीतर महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न आजीविका संवर्धन और नवाचारी गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक, दुर्लभ और विशिष्ट कृषि उत्पादों को पुनर्जीवित करने और उन्हें बाजार में उचित स्थान दिलाने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत विलुप्त हो रहे विष्णुभोग धान की किस्म का बड़े पैमाने पर जैविक उत्पादन, अत्याधुनिक तरीके से उसका प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और फिर सीधे बाजार में उसका विपणन (मार्केटिंग) किया जा रहा है। इस शानदार और जमीनी पहल का सबसे सुखद परिणाम यह हुआ है कि सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को घर बैठे ही सम्मानजनक रोजगार के नए-नए अवसर मिल रहे हैं। इसके कारण न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है, बल्कि उनके परिवारों की आय में भी निरंतर और स्थायी वृद्धि दर्ज की जा रही है।
राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने आगे बताया कि बिहान महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे यह उत्पाद आज बाजार में अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, शुद्धता और स्वाद के कारण एक भरोसेमंद ब्रांड के रूप में उभर रहे हैं। यह महिलाएं केवल व्यापार नहीं कर रही हैं, बल्कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में पीछे छूट रही हमारी समृद्ध स्थानीय कृषि परंपराओं और बीजों को संरक्षित करने का एक बेहद पुनीत कार्य भी कर रही हैं। वर्तमान समय में बाजार की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए महिला समूहों द्वारा केवल खेती करने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि वे उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग, बेहतरीन ब्रांडिंग and आधुनिक डिजिटल विपणन तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। यही वजह है कि सरकारी प्रदर्शनियों से लेकर खुले बाजार और मॉल तक में इस जैविक विष्णुभोग चावल की मांग दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने महिला स्व-सहायता समूहों के इस बेमिसाल और अभिनव प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा किए जा रहे ऐसे जमीनी प्रयास देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को सच साबित कर रहे हैं। अरुण साव ने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इस तरह उद्यमिता से जुड़ती हैं, तो वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक संबल देती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायी और जीवंत उदाहरण बन जाती हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे ये स्थानीय और शुद्ध जैविक उत्पाद छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा और अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रहे हैं, साथ ही हमारी विशिष्ट कृषि पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जिले में संचालित इस बेहतरीन और प्रेरक गतिविधि की खूब प्रशंसा करते हुए सभी महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों और इस पूरी मुहिम को बैकएंड से सपोर्ट करने वाले जिला प्रशासन की पूरी टीम को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसे संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत प्रयासों से ग्रामीण अंचलों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक स्तर बेहद मजबूत होगा और छत्तीसगढ़ के इन अनमोल स्थानीय उत्पादों को देश-विदेशी के बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच उपलब्ध होगी। कुल मिलाकर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की अरपा बिहान समूह की महिलाओं का यह प्रयास आज पूरे प्रदेश के लिए ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (टिकाऊ खेती) का एक सबसे सफल और चमकदार उदाहरण बनकर देश के सामने खड़ा है।

