छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास टूटा तो सर्पदंश से मौतों पर लगा ब्रेक: झाड़-फूंक छोड़ सीधे अस्पताल पहुंच रहे ग्रामीण, जागरूकता ने बचाईं 25 हजार से ज्यादा जानें…NV News
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NV News रायपुर, 7 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन के साथ ही विशेषकर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश (सांप काटने) का खतरा तेजी से मंडराने लगता है। लेकिन इस बार प्रदेश के ग्रामीण अंचलों से एक बेहद सुखद और क्रांतिकारी सामाजिक बदलाव की तस्वीर सामने आई है। राज्य में अंधविश्वास और पारंपरिक झाड़-फूंक के जाल को तोड़कर अब लोग सर्पदंश के बाद सीधे सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। जन-जागरूकता के इस महाअभियान के चलते प्रदेश में अब तक 25 हजार से ज्यादा लोगों की कीमती जानें बचाई जा चुकी हैं।
ओझा-गुनिया के चक्कर में समय पर इलाज न मिलना था बड़ी वजह
अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पुराने आंकड़ों पर गौर करें तो कभी छत्तीसगढ़ के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में सांप के काटते ही सबसे पहले स्थानीय ओझा, बैगा या गुनिया को बुलाया जाता था।
देर से पहुंचना बनता था काल: तंत्र-मंत्र, जड़ी-बूटी और झाड़-फूंक के चक्कर में घंटों का कीमती समय (गोल्डन ऑवर) बर्बाद हो जाता था।
अस्पताल पहुंचने तक फैल जाता था जहर: जब तक मरीज को सरकारी अस्पताल या जिला अस्पताल लाया जाता था, तब तक सांप का जहर पूरे शरीर में फैल चुका होता था और डॉक्टर चाहकर भी मरीज की जान नहीं बचा पाते थे। इसी अंधविश्वास के कारण हर साल सैकड़ों परिवारों के चिराग बुझ जाते थे।
एंटी स्नेक वेनम (Anti Snake Venom) ने बदली तस्वीर
जागरूकता लाई रंग: स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए गए सघन जागरूकता अभियानों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। ग्रामीणों को अब यह समझ आ गया है कि सांप के जहर का एकमात्र इलाज अस्पताल में मिलने वाला एंटी स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन ही है। अब ग्रामीण बिना एक पल गंवाए पीड़ित को खाट, मोटरसाइकिल या 108 एम्बुलेंस के माध्यम से तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचा रहे हैं।
मानसून को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद
वर्तमान मानसून सीजन को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश के सुदूर वनांचल क्षेत्रों जैसे बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, जशपुर और सरगुजा के सभी छोटे-बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शनों का पर्याप्त स्टॉक एडवांस में रखवा दिया गया है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल और निशुल्क इलाज मिल सके। अंधविश्वास पर विज्ञान की यह जीत छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य मॉडल के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।

