कुपोषण और एनीमिया पर आखिरी प्रहार: छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से लागू होगी केंद्र की ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’, राइस मिलर्स को दिए गए कड़े निर्देश…NV News

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NV News- रायपुर: छत्तीसगढ़ से कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। केंद्र सरकार की नई और बेहद महत्वाकांक्षी ‘इम्प्रूव्ड राइस स्कीम’ (Improved Rice Scheme) को आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। इसी सिलसिले में बुधवार को राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की अध्यक्षता खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने की। कार्यशाला में प्रदेशभर से आए राइस मिलर्स, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और मार्कफेड (Markfed) के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने अधिकारियों और राइस मिलर्स को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से बांटे जाने वाले चावल की गुणवत्ता को और बेहतर किया जाएगा, ताकि गरीब और ग्रामीण परिवारों को भरपूर पोषण मिल सके।

योजना के सुचारू संचालन के लिए राइस मिलों में फोर्टिफाइड राइस कर्नल (FRK) के मिश्रण की प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाया जाएगा। कार्यशाला में मिलर्स को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया गया और साफ चेतावनी दी गई कि गुणवत्ता में किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इस योजना के जरिए छत्तीसगढ़ के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया के स्तर को तेजी से कम करना है। 1 जुलाई से इस योजना के जमीनी स्तर पर उतरते ही राशन दुकानों के माध्यम से हितग्राहियों को यह विशेष पोषण युक्त चावल मिलने लगेगा।

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