Emergency Anniversary Event: आपातकाल की वर्षगांठ पर छत्तीसगढ़ में बीजेपी का बड़ा एक्शन प्लान, पूरे प्रदेश में होंगे सम्मेलन, रायपुर में ‘लोकतंत्र सेनानियों’ का होगा बड़ा सम्मान…NV News

Share this

NV News- Emergency Anniversary Event (आपातकाल वर्षगांठ कार्यक्रम): भारतीय राजनीति के इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख को लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन और नागरिक अधिकारों को कुचलने वाले सबसे स्याह और काले पन्ने के रूप में याद किया जाता है। इस वर्ष जब देश इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की एक और वर्षगांठ की दहलीज पर खड़ा है, तब छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे लेकर एक बेहद व्यापक और आक्रामक राजनीतिक अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। भारतीय जनता पार्टी इस दिन को हर साल की तरह इस बार भी ‘आपातकाल दिवस’ या ‘काला दिवस’ (Black Day) के रूप में मनाने जा रही है। पार्टी का उद्देश्य इस कार्यक्रम के जरिए आज की युवा पीढ़ी को यह याद दिलाना है कि कैसे पांच दशक पहले देश के लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया था। छत्तीसगढ़ बीजेपी संगठन ने इस बार केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर राज्य के हर एक मंडल और ब्लॉक स्तर तक जाकर कांग्रेस के खिलाफ तीखा राजनीतिक माहौल बनाने और जन-जागरण करने का एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है।

बीजेपी के इस प्रदेशव्यापी महाअभियान के तहत 25 जून को छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में विभिन्न प्रकार के वैचारिक, विरोध स्वरूप और सम्मानपरक कार्यक्रमों की लंबी श्रृंखला आयोजित की जाएगी। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस विशेष अभियान के मुख्य आकर्षणों में राज्य के सभी प्रमुख जिला मुख्यालयों में निकाला जाने वाला मौन जुलूस और शाम के समय निकाला जाने वाला विशाल मशाल जुलूस शामिल हैं। इसके अलावा, आपातकाल के दौरान तत्कालीन सरकार की तानाशाही और जेलों में बंद किए गए नेताओं की संघर्ष गाथा को प्रदर्शित करने के लिए ‘जेल से कोर्ट तक यात्रा’ जैसे प्रतीकात्मक और प्रभावी कार्यक्रमों का खाका खींचा गया है। इन प्रदर्शनों और रैलियों के माध्यम से बीजेपी सीधे तौर पर विपक्षी दल कांग्रेस की पुरानी नीतियों को कटघरे में खड़ा करेगी और जनता को बताएगी कि आपातकाल के दौरान किस तरह से न्यायपालिका, प्रेस की स्वतंत्रता और आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर ताला लगा दिया गया था।

इस पूरे प्रदेशव्यापी आयोजन का मुख्य और सबसे गरिमामय केंद्र बिंदु राज्य की राजधानी रायपुर होने जा रही है। रायपुर में राज्य स्तरीय ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन’ का एक भव्य और विशाल आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और बीजेपी संगठन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में उन सभी ‘लोकतंत्र सेनानियों’ (मीसा बंदियों) का नागरिक अभिनंदन और सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने साल 1975 से 1977 के बीच आपातकाल का पुरजोर विरोध किया था और बिना किसी डर के जेल की सलाखों के पीछे रहकर यातनाएं सही थीं। पार्टी का मानना है कि इन सेनानियों का त्याग और बलिदान आज के स्वतंत्र भारत के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, इसलिए उनके योगदान को समाज के सामने लाना बेहद जरूरी है। इस सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए बस्तर से लेकर सरगुजा तक के सुदूर अंचलों में रहने वाले मीसा बंदियों और उनके परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो बीजेपी का यह आक्रामक रुख केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और सोची-समझी चुनावी व वैचारिक रणनीति भी छिपी हुई है। बीजेपी इस पूरे अभियान के जरिए कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलने की पुरजोर कोशिश करेगी। हालिया दिनों में संविधान और लोकतंत्र को बचाने के नैरेटिव पर देश में हुई बहस के बीच, बीजेपी इस ‘काला दिवस’ के माध्यम से जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि असल में लोकतंत्र का गला किसने घोंटा था। प्रदेशभर में आयोजित होने वाले इन बौद्धिक सम्मेलनों और परिचर्चाओं में आपातकाल के दौर के दस्तावेजी साक्ष्य, पुरानी अखबारों की कतरनें और प्रतिबंधित किए गए साहित्यों की प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, ताकि वर्तमान पीढ़ी उस दौर की भयावहता को अपनी आंखों से देख और समझ सके।

इस भव्य और विस्तृत कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ बीजेपी की प्रदेश इकाई ने अपने सभी जिला अध्यक्षों, मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों, विधायकों और सांसदों को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पार्टी के आला नेताओं ने निर्देश दिए हैं कि इन सम्मेलनों में समाज के प्रबुद्ध जनों, जैसे वकीलों, प्रोफेसरों, डॉक्टरों, पत्रकारों और विशेष रूप से युवा छात्र-छात्राओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। गांवों और कस्बों में नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी, जहां आपातकाल के काले अध्यायों पर आधारित शॉर्ट डॉक्युमेंट्री और वीडियो क्लिप्स दिखाए जाएंगे। बहरहाल, 25 जून को होने वाली इस बड़ी राजनीतिक घेराबंदी से यह साफ है कि छत्तीसगढ़ का सियासी पारा एक बार फिर बेहद गर्म होने वाला है, जहां आपातकाल के पुराने जख्मों को कुरेदकर बीजेपी कांग्रेस के खिलाफ एक बड़ा जनमत तैयार करने की पूरी तैयारी में मुस्तैद दिख रही है।

Share this

You may have missed