Bastar Goncha Mahaparv: जगदलपुर में नेत्रोत्सव के साथ ऐतिहासिक गोंचा महापर्व शुरू, दिव्य श्रृंगार में विराजे भगवान जगन्नाथ; कल सजेगा रथ…NV News
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NV News जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग आज एक बार फिर अपनी अनूठी और ऐतिहासिक लोक संस्कृति के अनूठे रंग में रंग गया है। जगदलपुर में आस्था, परंपरा और बस्तरिया संस्कृति के अद्भुत समागम के साथ विश्व प्रसिद्ध ‘गोंचा महापर्व’ की औपचारिक शुरुआत हो गई है। लगभग 15 दिनों तक अणसर (एकांतवास) काल में रहने के बाद, आज भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने दिव्य और नयनाभिराम श्रृंगार में भक्तों के सामने प्रकट हुए। इस ‘नेत्रोत्सव’ के पावन अवसर पर भगवान के अलौकिक रूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
तुपकी की गूंज और बस्तरिया परंपराओं का अद्भुत नजारा
बस्तर के गोंचा पर्व की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की अनोखी परंपराएं हैं। नेत्रोत्सव पूजन संपन्न होने के साथ ही पूरा मंदिर परिसर भगवान जगन्नाथ के जयकारों और बस्तर के पारंपरिक “तुपकी” (बांस से बनी खिलौना बंदूक, जिससे ‘गोंचा’ फल की सांकेतिक गोली दागी जाती है) की गूंज से सराबोर हो गया। सदियों पुरानी इस बस्तरिया परंपरा को देखने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से हजारों आदिवासियों और श्रद्धालुओं का सैलाब जगदलपुर पहुंचा हुआ है।
कल निकलेगी भव्य रथयात्रा, रथों को सजाने का काम पूरा
नेत्रोत्सव की रस्म पूरी होने के बाद अब पूरे जगदलपुर शहर और बस्तरवासियों को कल (गुरुवार) होने वाली ऐतिहासिक व भव्य रथयात्रा का बेसब्री से इंतजार है। कल महाप्रभु जगन्नाथ विशाल और सुसज्जित काष्ठ रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे और अपनी मौसी के घर (जनकपुरी) प्रस्थान करेंगे। रथयात्रा को लेकर मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि इस महा-उत्सव को भव्यता और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके।

