AI वॉइस स्कैम का खौफनाक जाल: महज 3 सेकंड की रिकॉर्डिंग से हूबहू नकली आवाज बना रहे साइबर ठग; ऐसे खाली हो रहे बैंक खाते…NV News

Share this

नई दिल्ली, 5 जुलाई 2026। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक ने जहां डिजिटल दुनिया को बेहद आसान और एडवांस बनाया है, वहीं अब यह तकनीक साइबर अपराधियों का सबसे खतरनाक हथियार बन चुकी है। देश और दुनिया में इन दिनों ‘AI वॉइस क्लोनिंग स्कैम’ (AI Voice Scam) के मामलों में बाढ़ आ गई है। इस नए किस्म के साइबर अपराध में ठग पलक झपकते ही किसी भी व्यक्ति की हूबहू आवाज की नकल (क्लोन) तैयार कर रहे हैं और उनके करीबियों को फोन कर इमरजेंसी (आपातकाल) का झांसा देकर बैंक खाते साफ कर रहे हैं।

सोशल मीडिया बना अपराधियों का नया ‘हथियार’

तकनीकी विशेषज्ञों और साइबर पुलिस के मुताबिक, इस स्कैम को अंजाम देने के लिए अपराधियों को किसी बड़ी हैकिंग की जरूरत नहीं होती, बल्कि वे इंटरनेट पर उपलब्ध आपके डेटा का ही इस्तेमाल करते हैं।

सिर्फ 3 सेकंड का खेल: आधुनिक एआई वॉयस टूल्स इतने एडवांस हो चुके हैं कि उन्हें किसी की भी हूबहू आवाज तैयार करने के लिए महज 3 सेकंड की साफ ऑडियो रिकॉर्डिंग की आवश्यकता होती है।

कहाँ से चोरी हो रही आवाज?: साइबर अपराधी आपके या आपके बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स (जैसे इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक वीडियो, यूट्यूब शॉट्स या व्हाट्सएप वॉयस नोट) से आवाज का सैंपल चुराते हैं। इसके बाद एआई सॉफ्टवेयर की मदद से उस आवाज का सटीक ‘क्लोन’ (Clone) तैयार कर लिया जाता है।

ऐसे बुना जाता है ठगी का चक्रव्यूह (Modus Operandi)

आवाज चुराने के बाद अपराधी उस व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या करीबी दोस्तों को निशाना बनाते हैं।

भावनात्मक ब्लैकमेलिंग: ठग पीड़ित के परिजनों को फोन करते हैं। फोन कॉल पर दूसरी तरफ से बिल्कुल उनके बेटे या बेटी की ही आवाज सुनाई देती है, जो रोते हुए या घबराते हुए कहती है— “मेरा एक्सीडेंट हो गया है”, “मुझे पुलिस ने पकड़ लिया है” या “मैं बहुत बड़ी मुसीबत में हूँ, मुझे तुरंत ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करो।”

चूंकि आवाज हूबहू उनके अपने बच्चे या दोस्त की होती है, इसलिए परिजन बिना सोचे-समझे और घबराहट में तुरंत बताए गए बैंक खाते या यूपीआई (UPI) आईडी पर मोटी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। जब तक वे असलियत का पता लगाते हैं, तब तक देर हो चुकी होती है और ठग पैसे लेकर चंपत हो जाते हैं।

एआई वॉइस स्कैम से कैसे बचें? (Cyber Safety Tips)

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस जानलेवा ठगी से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण गाइडलाइंस जारी की हैं:

‘फैमिली कोडवर्ड’ तय करें: अपने परिवार के सदस्यों के साथ एक गुप्त कोडवर्ड (जैसे कोई खास शब्द या नंबर) तय करें। यदि कभी कोई आपातकालीन कॉल आए, तो सामने वाले से वह कोडवर्ड पूछें। ठग कभी भी उस कोडवर्ड को नहीं बता पाएगा।

घबराएं नहीं, कॉल बैक करें: ऐसी कोई भी कॉल आने पर तुरंत पैसे न भेजें। फोन काटकर पहले उस व्यक्ति के मूल नंबर पर दोबारा कॉल करें या उसके आसपास मौजूद अन्य लोगों से संपर्क कर सच्चाई का पता लगाएं।

सोशल मीडिया प्रोफाइल रखें लॉक: अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स (विशेषकर वॉयस ओवर वाली रील्स और पर्सनल वीडियो) को पब्लिक रखने के बजाय ‘प्राइवेट’ मोड पर रखें, ताकि अनजान लोग आपकी आवाज का गलत इस्तेमाल न कर सकें।

अजनबी कॉल्स पर रहें सतर्क: यदि कोई अनजान नंबर से आपकी आवाज रिकॉर्ड करने की नीयत से बार-बार सवाल पूछ रहा हो (जैसे- “क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं?”), तो तुरंत फोन काट दें।

यदि आप या आपका कोई परिचित ऐसे किसी एआई स्कैम का शिकार होता है, तो बिना देर किए तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

Share this

You may have missed