सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी स्कूलों में जारी रहेगा पाठ, चुनौती देने वाली याचिका खारिज…NV News
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बिलासपुर/रायपुर, 2 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में सुबह की सभा और प्रार्थना के दौरान सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और भोजन मंत्र की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर आज छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने राज्य सरकार के इस निर्देश को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती देने वाली जनहित याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद अब प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में पूर्व की भांति यह प्रार्थनाएं और मंत्रोच्चार जारी रहेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में बच्चों के नैतिक और सांस्कृतिक विकास के लिए प्रार्थना सभा में सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र सहित अन्य शांति मंत्रों को अनिवार्य किया गया था। सरकार के इस आदेश के खिलाफ कुछ संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकारी सहायता प्राप्त या सरकारी स्कूलों में किसी विशेष धार्मिक प्रार्थना को अनिवार्य करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 28 (धार्मिक शिक्षा पर रोक) का उल्लंघन है और यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है।
कोर्ट ने कहा- यह धार्मिक नहीं, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्य हैं
हाई कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की दोनों पक्षों की लंबी दलीलों और विस्तृत सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र या भोजन मंत्र का पाठ करना किसी धर्म विशेष को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की प्राचीन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और शिक्षा व्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है।
अदालत ने याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया और कहा कि:
स्कूलों में बच्चों को अनुशासित रखने, एकाग्रता बढ़ाने और भोजन के प्रति सम्मान जगाने के लिए इन मंत्रों का पाठ कराया जाता है।
इसे किसी भी रूप में धार्मिक कट्टरता या थोपी गई धार्मिक शिक्षा के रूप में नहीं देखा जा सकता।
राज्य सरकार का यह निर्देश पूरी तरह से वैध है और इसका उद्देश्य छात्रों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के इस निर्णय का शिक्षाविदों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और पलकों (अभिभावकों) ने स्वागत किया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षा विभाग ने भी संतोष व्यक्त किया है और कहा है कि कोर्ट के इस आदेश से स्कूलों में चल रही बेहतर व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए रखने की मुहिम को और बल मिलेगा।

