‘सोलर सिटी’: 18 सरकारी विभागों में लगेंगे 2,370 किलोवाट के सोलर प्लांट, सरकार ने दी मंजूरी…NV News
Share this
NV News- रायपुर। छत्तीसगढ़ की अत्याधुनिक और नई राजधानी ‘नवा रायपुर’ (Nava Raipur) को पूरी तरह से सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (CREDA) द्वारा तैयार की गई एक महत्वाकांक्षी योजना को सरकार ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत नवा रायपुर में स्थित 18 प्रमुख सरकारी विभागों, कार्यालयों और संस्थानों की छतों पर कुल 2,370 किलोवाट (2.37 मेगावाट) क्षमता के सौर ऊर्जा (Solar Power) प्लांट लगाए जाएंगे। सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को ‘रेस्को मॉडल’ (RESCO Model) के तहत लागू करने की मंजूरी दी है।
बिजली बिल में होगी भारी कटौती, ‘रेस्को मॉडल’ से लगेगा प्लांट
इस सोलर प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के बाद सरकारी विभागों की बिजली निर्भरता पारंपरिक ग्रिड पर काफी कम हो जाएगी:
क्या है रेस्को (RESCO) मॉडल?: इस मॉडल के तहत सोलर प्लांट लगाने का पूरा शुरुआती खर्च और रखरखाव (Maintenance) निवेश करने वाली डेवलपर कंपनी उठाएगी। सरकारी विभागों को अपने पास से कोई बड़ी पूंजी नहीं लगानी होगी। विभाग केवल उत्पादित होने वाली सौर ऊर्जा को एक तय और सस्ती दर पर खरीदेंगे।
18 विभागों का हुआ चयन: नवा रायपुर के मंत्रालय (महानदी भवन), विभागाध्यक्ष कार्यालय (इन्द्रावती भवन) समेत कुल 18 महत्वपूर्ण शासकीय भवनों और परिसरों को इस पहले चरण के लिए चिन्हित किया गया है, जहाँ की छतों का उपयोग सोलर पैनल लगाने के लिए होगा।
पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम
क्रेडा (CREDA) की तैयारी: इस सौर ऊर्जा परियोजना के लागू होने से नवा रायपुर न केवल आधुनिकता बल्कि पर्यावरण संरक्षण के मामले में भी देश के सामने एक मिसाल पेश करेगा। क्रेडा के अधिकारियों के मुताबिक, 2,370 किलोवाट क्षमता के इन प्लांटों से हर साल लाखों यूनिट ग्रीन एनर्जी (Green Energy) पैदा होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
इस प्रोजेक्ट के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकारी भवनों के आत्मनिर्भर होने से राज्य सरकार के राजस्व (राजकीय कोष) को हर साल बिजली बिल के रूप में होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च से बड़ी राहत मिलेगी। नवा रायपुर को पूरी तरह ईको-फ्रेंडली और स्मार्ट सिटी बनाने के विजन में यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा।

