छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि: प्रदेश में मिलीं ऊदबिलाव (Otters) की तीनों प्रमुख प्रजातियां, वन्यजीव वैज्ञानिक भी हैरान…NV News
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NV News- रायपुर। छत्तीसगढ़ के समृद्ध जंगलों और वन्यजीवों के संसार से एक बेहद अद्भुत और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। भारत में पाई जाने वाली ऊदबिलाव (Otters) की तीनों प्रमुख प्रजातियां छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जल स्रोतों और जंगलों में दर्ज की गई हैं। वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है, जिसने देश भर के वन्यजीव वैज्ञानिकों (Wildlife Scientists) को भी हैरत में डाल दिया है। राज्य में इन दुर्लभ जीवों की मौजूदगी छत्तीसगढ़ के समृद्ध नदी एवं आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र (Wetland Ecosystem) की सेहत का एक बड़ा प्रमाण है।
इन तीन क्षेत्रों में दर्ज की गई दुर्लभ ऊदबिलाव की प्रजातियां
वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किए जा रहे लगातार प्रयासों और शोध के बाद छत्तीसगढ़ के तीन अलग-अलग कोनों से इन प्रजातियों की पुष्टि हुई है:
यूरेशियन ऑटर (Eurasian Otter): अत्यंत दुर्लभ मानी जाने वाली इस प्रजाति का अस्तित्व कोरबा वनमंडल के स्वच्छ और प्राकृतिक जल स्रोतों में दर्ज किया गया है।
एशियन स्माल-क्लॉड ऑटर (Asian Small-clawed Otter): यह दुनिया की सबसे छोटी ऊदबिलाव प्रजातियों में से एक है, जिसे गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध ‘उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व’ में देखा गया है।
स्मूथ-कोटेड ऑटर (Smooth-coated Otter): बस्तर की प्राकृतिक विरासत माने जाने वाले इस ऊदबिलाव को ‘इन्द्रावती टाइगर रिजर्व’ के भीतर से बहने वाली जीवनदायिनी इंद्रावती नदी में पाया गया है।
संरक्षण के लिए वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी की मुस्तैदी
पारिस्थितिकी तंत्र के सूचक: वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि ऊदबिलाव किसी भी नदी या जलीय पर्यावरण के स्वास्थ्य के सूचक (Bio-indicators) होते हैं। इनका तीनों प्रमुख प्रजातियों में पाया जाना यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ की नदियां और जलाशय आज भी प्रदूषण मुक्त और जैव विविधता (Biodiversity) से भरपूर हैं।
इन दुर्लभ और संकटग्रस्त जीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए राज्य वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी की टीमें लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि इस खोज के बाद छत्तीसगढ़ वैश्विक पटल पर ईको-टूरिज्म और वाइल्डलाइफ रिसर्च के एक नए बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।

