मवेशी तस्करी का ‘खूनी ट्रायंगल’: देवभोग के जंगलों से ओडिशा तक फैला जाल, तीन राज्यों के बीच चल रहा तस्करी का गंदा खेल…NV News
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NV News- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में गौ-तस्करी का एक खतरनाक ‘ट्रायंगल कॉरिडोर’ सामने आया है। यहाँ के एजेंट बेहद शातिराना तरीके से ‘किसान’ का वेश धरकर तस्करी के खेल को अंजाम दे रहे हैं। इस पूरे सिंडिकेट का जाल तीन राज्यों—छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश तक फैला हुआ है।
ऐसे काम करता है तस्करी का नेटवर्क:
छत्तीसगढ़ (खरीदी): तस्करों के एजेंट गांव-गांव घूमकर किसानों से कम दामों में गाय-बछड़ों की खरीदी करते हैं।
ओडिशा (सौदा): देवभोग से महज 8 किमी दूर ओडिशा सीमा शुरू हो जाती है। रात के अंधेरे में मवेशियों को जंगल के रास्ते बॉर्डर पार कराया जाता है और धरमगढ़ जैसे बाजारों में इनका सौदा होता है।
आंध्र प्रदेश (कटाई): ओडिशा से इन मवेशियों को अंततः आंध्र प्रदेश के बूचड़खानों में कटाई के लिए भेज दिया जाता है।
ग्राउंड रिपोर्ट की हकीकत:
हाल ही में बीजू एक्सप्रेस-वे के किनारे गुरुवार की आधी रात को गाय-बछड़ों के बड़े झुंड के साथ संदिग्ध लोग देखे गए। पूछताछ करने पर इन लोगों ने पहले घबराहट दिखाई और फिर मवेशियों को धरमगढ़ बाजार ले जाने का बहाना बनाया। यह कॉरिडोर इतना सक्रिय है कि मुख्य सड़कों के बजाय तस्कर जंगल के रास्तों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस और सुरक्षा बलों की नजरों से बचा जा सके।
इस खुलासे ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मवेशी तस्करी रोकने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध धंधा लंबे समय से फल-फूल रहा है।

