66 रुपये में कैसे पालें पेट?’ छत्तीसगढ़ में हजारों रसोइयों का हल्लाबोल, 22 दिनों से जारी हड़ताल से मिड-डे मील ठप…NV News

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) बनाने वाले लगभग 87,000 रसोइयों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर राजधानी रायपुर के तूता (नया रायपुर) धरना स्थल पर रसोइयों का अनिश्चितकालीन आंदोलन पिछले 22 दिनों से लगातार जारी है। कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे बैठे इन रसोइयों का एक ही सवाल है कि आज के महंगाई के दौर में मात्र 66 रुपये की दैनिक मजदूरी पर परिवार का गुजारा कैसे संभव है? इस हड़ताल के कारण प्रदेश के हजारों स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला गरम भोजन बंद हो गया है।

‘छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोइया संयुक्त संघ’ के बैनर तले हो रहे इस आंदोलन में 95 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। रसोइयों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कई प्रदर्शनकारियों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्हें साल में केवल 10 महीने का मानदेय मिलता है, वह भी समय पर नहीं आता। रसोइयों की मुख्य मांग है कि उन्हें ‘कलेक्टर दर’ (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर कम से कम 440 रुपये प्रतिदिन या 11,400 रुपये मासिक वेतन दिया जाए।

आंदोलन के दौरान कई मार्मिक कहानियां भी सामने आ रही हैं। कोंडागांव से आए संघ के सचिव मेघराज बघेल ने बताया कि वे 30 साल से रसोइया हैं और आज भी 66 रुपये रोज पर अटके हुए हैं। वहीं, एक महिला रसोइया ने रोते हुए बताया कि उसने अपनी बेटी की मौत वाले दिन भी स्कूल में खाना बनाया ताकि बच्चे भूखे न रहें, लेकिन सरकार उनकी इस निष्ठा का सिला केवल 2000 रुपये महीने देकर कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक साय सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, वे स्कूलों में वापस नहीं लौटेंगे।

फिलहाल, प्रशासन की ओर से मानदेय में 1,000 रुपये की मामूली बढ़ोतरी का प्रस्ताव चर्चा में है, जिसे रसोइया संघ ने सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह उनकी मेहनत का अपमान है। इस हड़ताल का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के उन बच्चों पर पड़ रहा है जिनके लिए स्कूल का मध्यान्ह भोजन ही पोषण का मुख्य स्रोत है। अब देखना होगा कि 21 जनवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इन ‘रसोई के योद्धाओं’ के हक में कोई बड़ा फैसला लेते हैं या यह गतिरोध आगे भी जारी रहेगा।

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