नगर निगम में 100 करोड़ का ‘महाघोटाला’! फाइलों के खेल में गायब हुआ राजस्व, अधिकारियों के उड़े होश…NV News
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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नगर निगम में एक ऐसे सनसनीखेज घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने निगम प्रशासन और सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच और सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार, नगर निवेश (TNC) और मार्ग संरचना (Road Layout) अप्रूवल के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का खेल खेला गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें अब रिकॉर्ड रूम से गायब हैं।
कैसे हुआ करोड़ों का ‘खेल’?
घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद शातिर तरीके से तैयार की गई थी। निगम के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में मानचित्र (Map) और लेआउट पास कराने के बदले लिए जाने वाले शुल्क में भारी हेराफेरी की गई:
नकली रसीदें और फर्जी अप्रूवल: कई बिल्डरों और रसूखदारों को फर्जी तरीके से टीएनसी और मार्ग संरचना की अनुमति दे दी गई, जबकि उसका पैसा सरकारी खजाने में जमा ही नहीं हुआ।
राजस्व की चोरी: विकास शुल्क (Development Charges) के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई, जिससे निगम को सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान पहुँचा।
फाइलें गायब: जब मामले की आंतरिक जांच की भनक लगी, तो संबंधित महत्वपूर्ण फाइलों को गायब कर दिया गया ताकि साक्ष्य न मिल सकें।
अधिकारियों का क्या है कहना?
इस मामले पर नगर निगम के आला अधिकारी अब चुप्पी साधने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि दबाव बढ़ने पर जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वे फाइलों को ट्रैक करने के लिए डिजिटल लॉग की जांच कर रहे हैं। निगम कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। दोषियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी भी चल रही है।
विपक्ष का हमला और जनता में आक्रोश
100 करोड़ के इस कथित घोटाले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इसे “सिस्टमैटिक करप्शन” करार दिया है और मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) या ईओडब्ल्यू (EOW) से कराने की मांग की है। राजधानी के नागरिकों में भी इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनके द्वारा दिए गए टैक्स का पैसा विकास के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि गायब फाइलों के पीछे छिपे ‘असली चेहरों’ तक कानून के हाथ कब पहुँचते हैं।
