धनवान ट्रस्ट, गरीब पुजारी: रायपुर के प्रतिष्ठित मंदिरों में करोड़ों की कमाई, लेकिन सेवादारों को मिल रहा महज चंद हजार वेतन…NV News
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NV News- रायपुर: राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मंदिर ट्रस्ट और समितियां आज आर्थिक रूप से बेहद संपन्न हैं, लेकिन इन मंदिरों में दिन-रात सेवा करने वाले पुजारियों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। जैतूसाव मठ और महामाया मंदिर जैसे बड़े धार्मिक संस्थानों की संपत्ति करोड़ों में है और उनकी वार्षिक आय भी करोड़ों का आंकड़ा पार कर रही है। इसके बावजूद, इन मंदिरों के गर्भगृह में सेवा देने वाले पुजारियों और कर्मचारियों को मिलने वाला मानदेय उनकी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी पर्याप्त नहीं है।
शहर के प्रमुख मंदिरों की मासिक आय लाखों रुपये में है, जो दान-दक्षिणा और अचल संपत्तियों के किराए से आती है। विडंबना यह है कि जहाँ ट्रस्टों के बैंक खाते फूल रहे हैं, वहीं पुजारियों को वेतन के नाम पर केवल 5 से 10 हजार रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। महंगाई के इस दौर में इतनी कम राशि में परिवार चलाना पुजारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सेवा के नाम पर पुजारियों का यह आर्थिक शोषण अब चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि प्रबंधन और वेतन के बीच का अंतर बहुत बड़ा हो चुका है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि जो पुजारी मंदिर की परंपराओं और मर्यादाओं को जीवित रखते हैं, उनकी आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारी ट्रस्टों की होनी चाहिए। जैतूसाव मठ और महामाया मंदिर जैसे संस्थानों के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, फिर भी कर्मचारियों और पुजारियों के वेतन में वृद्धि न करना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। इस विसंगति को दूर करने के लिए अब सामाजिक स्तर पर मांग उठने लगी है कि ट्रस्टों की आय का एक निश्चित हिस्सा सेवादारों के सम्मानजनक वेतन के लिए निर्धारित किया जाए।

