PWD News:- लेटलतीफी पर कड़ा एक्शन: छत्तीसगढ़ में सड़कों-पुलों के निर्माण में देरी पर बिफरे डिप्टी सीएम अरुण साव, दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त…NV News
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NV News- छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास और सड़कों व पुलों के निर्माण कार्यों में ढिलाई बरतने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री अरुण साव ने राज्य में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। डिप्टी सीएम के कड़े रुख और सख्त लहजे में दिए गए निर्देशों के तुरंत बाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तय समय-सीमा में काम पूरा न करने वाले दो बड़े ठेकेदारों के पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
प्रशासनिक हलकों में इस बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, फील्ड पर चल रहे कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने और बार-बार चेतावनी के बावजूद लापरवाही बरतने वाले 8 अन्य ठेकेदारों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है। इसके साथ ही, पूर्व में जिन दो ठेकेदारों को नोटिस थमाया गया था, उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए जवाबों का बारीकी से तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है। विभाग ने उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य अभियंता (Chief Engineer) से अंतिम प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तलब किया है।
इस कड़ी कार्रवाई पर अपना रुख साफ करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दोटूक शब्दों में कहा कि राज्य के विकास और आम जनता की सुविधा से जुड़े निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य तय समय के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ सड़कों व पुलों का निर्माण पूरा करना है। जो भी ठेकेदार या एजेंसी सरकारी नियमों की अनदेखी करेगी या काम को लटकाकर रखेगी, उसके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग सहित बेहद कठोर कानूनी और वित्तीय कदम उठाए जाएंगे। 10 जून को भी विभाग द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्यीय मार्गों की समीक्षा के दौरान ऐसे ही कड़े संकेत दिए गए थे।
डिप्टी सीएम के इस ‘एक्शन मोड’ में आने के बाद लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों ने भी मैदानी स्तर पर मॉनिटरिंग तेज कर दी है। सभी संभागों के अधीक्षण अभियंताओं और कार्यपालन अभियंताओं को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे प्रोजेक्ट्स का नियमित रूप से भौतिक सत्यापन करें। यदि कहीं भी ठेकेदारों द्वारा जानबूझकर देरी की बात सामने आती है, तो बिना किसी कूटनीतिक ढिलाई के तुरंत उनके अनुबंध निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सरकार के इस सख्त कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में अटके हुए कई महत्वपूर्ण सड़क और पुल प्रोजेक्ट्स की गति में अब तेजी आएगी।

