Politics – बिहार में ‘सम्राट’ युग की शुरुआत: सम्राट चौधरी बने बिहार के नए मुख्यमंत्री; भाजपा को 36 साल बाद मिला अपना पहला CM…NV News
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NV News – पटना। बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली है। यह बिहार के इतिहास में पहली बार है जब भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है।
नीतीश कुमार का इस्तीफा और नई शुरुआत
करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार ने मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की पटकथा लिखी गई थी। नीतीश कुमार ने स्वयं सम्राट चौधरी के नाम का समर्थन किया, जिसके बाद एनडीए (NDA) विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया।
शपथ ग्रहण समारोह: लोक भवन में हुआ आयोजन
बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को पटना के लोक भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।
दो उपमुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी के साथ जदयू (JD-U) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी मंत्री पद की शपथ ली। ये दोनों नेता नई सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे।
लव-कुश समीकरण: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी (कुशवाहा/कोइरी समाज) को मुख्यमंत्री और विजय चौधरी (कुर्मी समाज के करीबी समीकरण) को उपमुख्यमंत्री बनाकर भाजपा और जदयू ने अपने ‘लव-कुश’ वोट बैंक को और मजबूत किया है।
कौन हैं सम्राट चौधरी?
57 वर्षीय सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।
राजनीतिक सफर: उन्होंने अपना राजनीतिक करियर 90 के दशक में शुरू किया था। वे राजद और जदयू में रहने के बाद 2018 में भाजपा में शामिल हुए।
ओबीसी चेहरा: सम्राट चौधरी बिहार में एक कद्दावर ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) नेता के रूप में जाने जाते हैं। उनकी ताजपोशी को भाजपा की 2025 विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत और 2029-30 के मिशन के तौर पर देखा जा रहा है।
शपथ के बाद पहला बयान
शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“यह केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा करने और उनके सपनों को पूरा करने का एक पवित्र अवसर है। मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लेता हूं।”
बिहार में नीतीश कुमार के युग के अंत और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की शुरुआत को राज्य की राजनीति में एक बड़े ‘पावर शिफ्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है।

