Mining News: खनन प्रभावित वन भूमि के वैज्ञानिक पुनरुद्धार को मिलेगी प्राथमिकता…NV News

Share this

NV News रायपुर, 21 अगस्त 2026। खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित वन भूमि को दोबारा प्राकृतिक एवं स्वस्थ स्वरूप में विकसित करने के लिए वैज्ञानिक वानिकी को प्राथमिकता दी जाएगी। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कोरबा प्रवास के दौरान एनटीपीसी के प्रशासनिक भवन में सार्वजनिक एवं निजी उपक्रमों के प्रतिनिधियों और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।

बैठक में वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप खनन प्रभावित वन भूमि के पुनरुद्धार को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि खनन के बाद केवल पौधरोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भूमि को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्स्थापित कर उसे दोबारा जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कंपनियों को स्थानीय और देशज प्रजातियों को प्राथमिकता देने तथा क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, जल उपलब्धता और प्राकृतिक वन संरचना के अनुसार पौधों का चयन करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। खनन प्रभावित क्षेत्रों में मृदा संरक्षण, भू-क्षरण की रोकथाम, जैव विविधता संवर्धन और वन्यजीवों के आवास संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने औद्योगिक एवं खनन कंपनियों को सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय समुदायों के आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए।

बैठक में वन विभाग के मैदानी अधिकारियों को पुनरुद्धार कार्यों की नियमित निगरानी करने और कार्यों की गुणवत्ता, पौधों की उत्तरजीविता तथा वैज्ञानिक मानकों के पालन की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खनन के बाद वन भूमि की बहाली केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देना चाहिए। इसके लिए स्थानीय प्रजातियों, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को शामिल करते हुए टिकाऊ रेस्टोरेशन मॉडल विकसित किया जाएगा।

Share this