जल जीवन मिशन का बुरा हाल; स्वीकृत 107 में से बनीं सिर्फ 77 पानी टंकियां, काम अधूरा छोड़कर भागे ठेकेदार….NV News
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NV News राजनांदगांव, 10 जुलाई 2026। केंद्र और राज्य शासन की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) योजना, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक साफ पेयजल पहुंचाना है, राजनांदगांव जिले में प्रशासनिक उदासीनता और ठेकेदारों की मनमानी की वजह से दम तोड़ती नजर आ रही है। जिले में इस मिशन का हाल बेहद बुरा है। जमीनी हकीकत यह है कि योजना की शुरुआत के तीन साल बीत जाने के बाद भी जिले में मिशन का कार्य शत-प्रतिशत पूरा होना तो दूर, आधे से अधिक गांवों में बुनियादी ढांचा ही तैयार नहीं हो सका है।
एक तरफ जहां गांवों में जलापूर्ति के लिए तय समय-सीमा के भीतर पानी टंकियों का निर्माण नहीं हो पाया है, वहीं जिले के करीब 16 हजार से अधिक ग्रामीण घरों में अब तक नल का कनेक्शन भी नहीं पहुंच सका है। इस भारी कछुआ चाल की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि संबंधित ठेकेदारों ने वित्तीय गड़बड़ी और अपनी सुस्ती के चलते काम को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया है और मौके से भाग खड़े हुए हैं।
राजनांदगांव ब्लॉक के चौंकाने वाले आंकड़े: लक्ष्य बनाम हकीकत
जल जीवन मिशन के तहत अकेले राजनांदगांव ब्लॉक (विकासखंड) में ही विकास कार्यों की स्थिति बेहद निराशाजनक बनी हुई है:
टंकियों का निर्माण अटका: ब्लॉक के विभिन्न गांवों में सुचारू जल आपूर्ति के लिए कुल 107 पानी टंकियों के निर्माण की स्वीकृति विभाग द्वारा दी गई थी। लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही के चलते तीन वर्षों में केवल 77 पानी टंकियां ही बनकर तैयार हो सकी हैं, जिनमें से कई में अभी तकनीकी परीक्षण बाकी है। शेष टंकियों का काम अधर में लटका हुआ है।
16,000 घरों में सूखा है नल: पानी टंकी न बनने और पाइपलाइन न बिछने का सीधा खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ब्लॉक के लगभग 16,000 से अधिक घरों में अब तक नल कनेक्शन स्थापित नहीं किया जा सका है, जिससे महिलाएं आज भी दूर-दराज के हैंडपंपों और कुओं से पानी ढोने को मजबूर हैं।
ठेकेदारों की मनमानी पर नहीं कस सका शिकंजा
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के मुताबिक, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों की नियमित और कड़ाई से मॉनिटरिंग नहीं की गई। कई दागी ठेकेदारों को काम का ठेका दे दिया गया, जिन्होंने शुरुआती भुगतान उठाने के बाद काम बंद कर दिया। कई गांवों में आधी-अधूरी पाइपलाइन बिछाकर छोड़ दी गई है, जिससे सड़कें भी खोद दी गई हैं और ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पीएचई विभाग के उच्चाधिकारी लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ क्या सख्त कानूनी कदम उठाते हैं और इन अधूरी परियोजनाओं को कब तक पूरा कर ग्रामीणों की प्यास बुझा पाते हैं।

