Sonam Wangchuk Protest: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर झुका अंतरराष्ट्रीय मीडिया; ‘द गार्जियन’ और ‘बीबीसी’ ने लद्दाख आंदोलन को बताया भारत की अंतरात्मा की आवाज…NV News

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NV News Raipur 17 जुलाई 2026। लद्दाख की संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाने, राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के सुरक्षा कवच की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और अन्वेषक सोनम वांगचुक का आंदोलन अब वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (BBC News) और ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ (The Guardian) सहित दुनिया के कई बड़े मीडिया घरानों ने वांगचुक की भूख हड़ताल और उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर व्यापक ग्राउंड रिपोर्ट और राजनीतिक विश्लेषण प्रकाशित किए हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टिंग के 3 मुख्य बिंदु

वैश्विक मीडिया ने वांगचुक के आंदोलन के विभिन्न आयामों को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखा है:

1. ‘गंभीर भुखमरी’ के चरण में शरीर: बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अनशन के 19वें दिन में प्रवेश करने के साथ ही वांगचुक का वजन करीब 9 किलो तक गिर चुका है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका शरीर अब गंभीर भुखमरी (Severe Starvation) के उस दौर में है जहां मांसपेशियां और वसा तेजी से टूटने लगते हैं। इस शारीरिक संकट के बावजूद उन्होंने चिकित्सा सहायता लेने या अनशन तोड़ने से पूरी तरह मना कर दिया है।

2. पर्यावरण से शिक्षा सुधारों तक का सफर: अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने इस बात पर आश्चर्य जताया है कि लद्दाख की वादियों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश की राजधानी में युवाओं, छात्रों और शिक्षा प्रणाली में सुधारों (जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित विसंगतियां) की मांग के साथ जुड़ चुका है। इसने भारत की विशाल युवा आबादी के संघर्ष को एक नया चेहरा दे दिया है।

3. ‘द गार्जियन’ का विश्लेषण: जन आंदोलन के धड़कते दिल: ‘द गार्जियन’ ने अपने लेख में सोनम वांगचुक को भारत के वर्तमान नागरिक आंदोलन का “धड़कते दिल” (Beating Heart) करार दिया है। अखबार ने लिखा कि एक वैज्ञानिक और शांतिप्रिय विचारक का इस तरह अपनी जान दांव पर लगाना भारत की लोकतांत्रिक चेतना और नीति निर्माताओं को झकझोर रहा है।

“मांसपेशियां कमजोर, लेकिन हौसला अडिग”— 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का आह्वान

अत्यंत कमजोर शारीरिक स्थिति के बावजूद वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया भर के अपने समर्थकों को संदेश भेजा है। उन्होंने बेहद धीमी आवाज में कहा कि भले ही उनका शरीर कमजोर हो रहा है, लेकिन लद्दाख के अधिकारों के लिए उनका हौसला और संकल्प पूरी तरह अडिग है।

वांगचुक ने देश के युवाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी लोकतांत्रिक मांगों को मजबूती से सरकार के सामने रखने के लिए 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च में शांतिपूर्ण तरीके से बड़ी संख्या में एकजुट हों। दूसरी ओर, अदालती हस्तक्षेप के बाद दिल्ली प्रशासन और डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी शारीरिक स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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