पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर का निधन, राजनीतिक जगत में शोक की लहर
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नई दिल्ली: राजनीतिक जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि होते ही पूरे राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बीमार थे और लातूर स्थित अपने आवास “देवघर” में ही उनका उपचार चल रहा था। शुक्रवार सुबह लगभग 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
लंबी बीमारी से जूझ रहे थे
शिवराज पाटिल चाकुरकर कई सप्ताह से अस्वस्थ थे और चिकित्सकीय देखभाल उनके घर पर ही हो रही थी। वे भारतीय राजनीति में एक सशक्त और सजग व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। अपने राजनीतिक करियर में उन्होंने कई संवैधानिक पदों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1980 में पहली बार चुने गए सांसद
शिवराज पाटिल ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस में स्नातक और मुंबई यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की थी।
वे पहली बार 1980 में लातूर से लोकसभा के लिए चुने गए और इसके बाद 1999 तक लगातार सात बार चुनाव जीतकर संसद का प्रतिनिधित्व किया।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा वे 1991 से 1996 तक लोकसभा के स्पीकर भी रहे। इस दौरान उन्होंने देश और विदेश में कई संसदीय सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया।
राजनीतिक जगत में शोक
वरिष्ठ नेताओं, विभिन्न दलों के सांसदों और समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। शिवराज पाटिल का जाना भारतीय राजनीति और संसदीय परंपराओं के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
