Dhamtari News: पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की अनूठी पहल, धमतरी का जोरातराई बनेगा छत्तीसगढ़ का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव….NV News
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NV News धमतरी: छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। इसके तहत धमतरी जिले के ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला ‘कार्बन न्यूट्रल गांव’ के रूप में विकसित करने की तैयारी तेजी से चल रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैसों के हानिकारक उत्सर्जन को कम करना, प्राकृतिक जल स्रोतों व अन्य संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा किसानों को खेती के नए और उन्नत विकल्प उपलब्ध कराना है।
इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत खेती में पानी की भारी बचत करने वाली आधुनिक ‘AWD’ (अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग) तकनीक को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही, जिले में पारंपरिक फसलों के अलावा दलहन और तिलहन फसलों का रकबा दोगुना करने का भी एक निर्धारित लक्ष्य रखा गया है, जिससे फसल चक्र मजबूत हो और किसानों को आर्थिक रूप से अधिक लाभ मिल सके। प्रशासन और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।
धान की पारंपरिक खेती में पानी की अत्यधिक खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए AWD तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। इस आधुनिक तकनीक के अंतर्गत खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय, मिट्टी की नमी और आवश्यकता के अनुसार तय अंतराल पर ही सिंचाई की जाती है। इससे सिंचाई के लिए भूजल और अन्य जल संसाधनों की भारी बचत होती है, जो पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, धान के खेतों में लगातार पानी भरा रहने से मीथेन गैस का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। AWD तकनीक अपनाने से खेतों से होने वाले इस मीथेन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करने में मदद मिलती है। इस विधि से न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है, बल्कि पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने से फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
स्थानीय किसानों को इस नई तकनीक से जोड़ने के लिए कृषि विभाग और जिला प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे किस प्रकार कम पानी और कम लागत में बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। जोरातराई गांव को कार्बन न्यूट्रल बनाने के इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को आने वाले समय में प्रदेश के अन्य गांवों में भी लागू किए जाने की योजना है, ताकि छत्तीसगढ़ हरित कृषि की दिशा में आगे बढ़ सके।
पर्यावरणविदों और कृषि प्रेमियों ने प्रशासन के इस कदम की भूरी-भरी प्रशंसा की है। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में टिकाऊ और पर्यावरण-हितैषी कृषि प्रणालियों को अपनाना समय की सबसे बड़ी मांग है। जोरातराई गांव की यह पहल आने वाले दिनों में न केवल धमतरी बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए कृषि क्षेत्र में एक रोल मॉडल बनकर उभरेगी।

