वंदे मातरम् बहस पर टकराव तेज: राहुल गांधी का अमित शाह पर तंज

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नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम् को लेकर छिड़ी बहस अब और तीखी हो गई है। राज्यसभा में जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर जोर दिया, वहीं कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शाह पर मानसिक दबाव में होने का आरोप लगाया है।

“अमित शाह घबराए हुए थे” — राहुल गांधी का आरोप

राहुल गांधी ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “अमित शाह जी कल बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने गलत भाषा का उपयोग किया, उनके हाथ कांप रहे थे। वे भारी मानसिक दबाव में थे — यह सभी ने देखा। मैंने उनसे सीधे सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने जवाब देने से बचने की कोशिश की। मैंने संसद में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा की चुनौती दी, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।”

अमित शाह का बयान: ‘वंदे मातरम् राष्ट्र की आत्मा को जगाने वाला मंत्र’

राज्यसभा में 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् वह मंत्र है जिसने सोए हुए राष्ट्र में नई चेतना जगाई। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत के आत्मबोध, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है और देश की प्रगति में इसकी भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी।

शाह के अनुसार, “कुछ लोग वंदे मातरम् की चर्चा को चुनावों से जोड़कर इसका महत्व घटाना चाहते हैं, जबकि यह गीत केवल बंगाल नहीं, पूरे भारत की आत्मा का हिस्सा है।”

नेहरू और इंदिरा गांधी पर भी साधा निशाना

अमित शाह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया कि उन्होंने वंदे मातरम् को दो अंतरों तक सीमित कर एक नए प्रकार के तुष्टीकरण की शुरुआत की।

उन्होंने इंदिरा गांधी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा, “वंदे मातरम् के 100 वर्ष पूरे होने पर इसे बोलने वालों को जेल भेजा गया। आपातकाल लगाया गया, विपक्ष को दबाया गया और मीडिया पर ताले लगा दिए गए।”

 

वंदे मातरम् पर बहस क्यों तेज हुई?

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक गीत रहा है। हालिया सत्र में इस पर चर्चा के दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई, जिसके चलते कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट भी किया।

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