Chhattisgarh GST Reform: 57वीं जीएसटी परिषद की सिफारिशों से व्यापारियों को राहत, ई-वे बिल से रिफंड तक प्रक्रियाएं होंगी आसान…NV News

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NV News रायपुर, 8 अक्टूबर 2026। 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत के लिए कई प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इन प्रस्तावों को व्यापार सुगमता, कर प्रशासन में पारदर्शिता और अनुपालन का बोझ कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत कर दरों में सुधार के बाद अब प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य व्यापारियों पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ कम करना, कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

गिरफ्तारी और अभियोजन के प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश

जीएसटी परिषद ने कर कानून से गिरफ्तारी की शक्ति से संबंधित धारा 69 को हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर राशि की सीमा को वर्तमान 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। सामान्य जुर्माने की अधिकतम राशि को भी 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है।

इन बदलावों का उद्देश्य सामान्य प्रक्रियागत त्रुटियों और छोटे मामलों में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत देना है। हालांकि जानबूझकर कर चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

ई-वे बिल जांच में बदलाव, बिना ठोस सूचना वाहन रोकने पर नियंत्रण

ई-वे बिल की जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। किसी मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना होना और संयुक्त आयुक्त या उससे उच्च स्तर के अधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ई-वे बिल की जांच उसी राज्य में की जा सकेगी, जहां माल भेजने वाला या प्राप्त करने वाला स्थित है। केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में जांच के नाम पर मालवाहक वाहनों को रोकने की व्यवस्था पर नियंत्रण होगा।

इससे परिवहन के दौरान अनावश्यक देरी कम होने, लॉजिस्टिक्स लागत घटने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रिफंड प्रक्रिया होगी तेज और तकनीक आधारित

जीएसटी रिफंड व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का पूरा रिफंड सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत किए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके लिए अलग से अधिकारी की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।

निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे (Inverted Duty Structure) से जुड़े मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल मंजूर करने का प्रस्ताव है। वहीं रिफंड आवेदन की जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है।

इससे व्यापारियों और उद्यमियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक अटकने से बच सकेगी और निर्यातकों तथा छोटे एवं मध्यम उद्योगों को राहत मिलेगी।

जीएसटी पंजीयन और ई-कॉमर्स कारोबार में सरलता

जीएसटी पंजीयन और उसमें संशोधन की प्रक्रिया को भी आसान बनाने का प्रस्ताव है। मुख्य व्यवसाय स्थल को छोड़कर पंजीयन से जुड़ी अन्य जानकारियों में संशोधन पोर्टल के माध्यम से स्वतः किया जा सकेगा। पंजीयन निरस्त कराने की प्रक्रिया को भी अधिक सरल और स्वचालित बनाया जाएगा।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत देने की सिफारिश की गई है। ऐसे विक्रेताओं को प्रत्येक राज्य में अलग कार्यालय स्थापित करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। इससे छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और नए उद्यमियों के लिए देशभर में कारोबार करना आसान हो सकता है।

ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव

जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा का दायरा बढ़ाने की भी सिफारिश की है। प्रस्तावित व्यवस्था में पात्रता के अनुसार आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन पर भी ITC उपलब्ध हो सकेगा।

इससे कर पर कर लगने की समस्या कम करने और उद्योगों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

छोटे करदाताओं को नोटिस, जुर्माने और लेट फीस में राहत

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। धोखाधड़ी से जुड़े नहीं होने वाले मामलों में निर्धारित समय के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर केवल 5 प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है।

इसके अलावा 5 करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने में देरी पर राहत देने की सिफारिश की गई है। यदि वे संबंधित महीने के अंत तक अपना रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो उन्हें विलंब शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है।

1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य

ओ.पी. चौधरी ने बताया कि इन प्रक्रियागत सुधारों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के बाद अब कर अनुपालन, पंजीयन, रिफंड, ई-वे बिल जांच और दंडात्मक प्रावधानों में सरलीकरण की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे व्यापार जगत में विश्वास बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत को भी लाभ

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित सुधारों का असर छत्तीसगढ़ के व्यापार, उद्योग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर भी पड़ेगा। सरल जीएसटी प्रक्रियाओं से कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होने और कार्यशील पूंजी के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेश, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है। केंद्र के कर सुधारों और राज्य के व्यापार सुगमता संबंधी प्रयासों से औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ा सुधार

ओ.पी. चौधरी ने कहा कि 57वीं जीएसटी परिषद की सिफारिशों में कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया गया है। उनके अनुसार गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों में बदलाव, ई-वे बिल जांच में सुधार, स्वचालित रिफंड, सरल पंजीयन, ITC का विस्तार और छोटे व्यापारियों को राहत जैसे कदम व्यापार सुगमता की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि इन प्रक्रियागत सुधारों से निवेश और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलने तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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