नगर निगम में ‘कमीशनराज’ के खिलाफ फूटा गुस्सा: ठेकेदारों का काम बंद प्रदर्शन, कहा— बिना चढ़ावा नहीं बढ़ती फाइल, 100 करोड़ से ज्यादा बकाया…NV News

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NV News रायपुर, 6 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर नगर पालिक निगम में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के ठेकेदारों ने बकाया भुगतान न मिलने और फाइलों को आगे बढ़ाने के बदले मोटी रकम मांगे जाने के विरोध में सोमवार को मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित ठेकेदारों ने पूर्व चेतावनी के तहत शहर में चल रहे विकास कार्यों को पूरी तरह बंद कर दिया और नगर निगम मुख्यालय के सामने बैठकर उग्र प्रदर्शन किया। ठेकेदारों का आरोप है कि निगम में बिना ‘चढ़ावा’ और कमीशन दिए एक भी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है।

100 करोड़ से अधिक का भुगतान बकाया, काम बंद की चेतावनी

प्रदर्शनकारी ठेकेदारों ने बताया कि नगर निगम प्रशासन द्वारा किए गए विकास कार्यों का 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान महीनों और सालों से अटका पड़ा है। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनके पूरे बकाए का भुगतान नहीं हो जाता और कमीशनखोरी पर लगाम नहीं लगती, तब तक शहर में विकास और निर्माण से जुड़े सभी काम पूरी तरह ठप रहेंगे।

“अधिकारी, जोन अध्यक्ष और पार्षदों के रेट तय”

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: ठेकेदारों ने निगम की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यहाँ भ्रष्टाचार चरम पर है। ठेकेदारों के मुताबिक, नगर निगम में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया के लिए अधिकारियों, जोन अध्यक्षों और पार्षदों के कमीशन के रेट अलग-अलग तय हैं। जब तक सभी स्तरों पर तय प्रतिशत का कमीशन नहीं पहुंच जाता, तब तक भुगतान की फाइलों को दबाकर रखा जाता है।

महापौर और कमिश्नर पर साधा निशाना

ठेकेदारों ने अपनी बदहाली के लिए नगर निगम कमिश्नर (आयुक्त) संबित मिश्रा और महापौर मीनल चौबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शीर्ष स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि ठेकेदारों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील बने हुए हैं।

ठेकेदारों ने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और उनके सामने मजदूरों को मजदूरी देने का संकट खड़ा हो गया है; वहीं दूसरी तरफ निगम प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के लिए विकास कार्यों में देरी और गुणवत्ताहीन कार्य का ठीकरा सीधे ठेकेदारों के सिर पर फोड़ रहा है। इस बड़े प्रदर्शन के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया है, हालांकि इस मामले पर अब तक निगम प्रशासन या महापौर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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