Agriculture News:- खेत बचाओ अभियान: रासायनिक उर्वरकों को छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान, घटेगी लागत और बढ़ेगी शुद्ध आय..NV News
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NV News– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का आगाज किया गया है। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय भव्य प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के वन, जलवायु परिवर्तन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप शामिल हुए। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने से ही कृषि टिकाऊ बनेगी। प्राकृतिक खेती न सिर्फ खेती की लागत घटाती है, बल्कि किसानों की शुद्ध आय को बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी पुनर्जीवित करती है।
इस विशेष कार्यशाला के दौरान कृषि, उद्यानिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन, रेशम विभाग और स्थानीय कृषि महाविद्यालय द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कृषि नवाचार तथा आजीविका संवर्धन पर आधारित एक विशाल प्रदर्शनी लगाई गई। मंत्री केदार कश्यप और विशिष्ट अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का बारीकी से अवलोकन किया और नई तकनीकों के संबंध में वहां मौजूद वैज्ञानिकों व किसानों से सीधा संवाद किया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने जिले के सैकड़ों किसानों को हल्दी की उन्नत किस्म के प्रकंद, पोषक तत्वों से भरपूर रागी के प्रमाणित बीज और प्राकृतिक कृषि में उपयोग की जाने वाली विभिन्न जैविक सामग्रियां निःशुल्क वितरित कीं।
समारोह में नारायणपुर जिले का नाम राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर गौरवान्वित करने वाले प्रगतिशील कृषकों को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इनमें प्रतिष्ठित ‘मिलियनेयर कृषक अवार्ड’ से सम्मानित किसान चैतूराम यादव व नीलकंठ नाग, ‘बेस्ट फार्मर इन इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम अवार्ड’ विजेता सुरेन्द्र नाग तथा ‘राज्यपाल सम्मान’ से नवाजी गईं महिला कृषक श्रीमती गीता नाग शामिल रहीं। मंत्री ने किसानों से जीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित पारंपरिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बड़े पैमाने पर व्यावहारिक रूप से अपनाने की अपील की।
कलेक्टर नम्रता जैन ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य ध्येय मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) का संरक्षण करना और प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने किसानों को घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्न्यास्त्र जैसे घरेलू व प्राकृतिक कीटनाशकों को बनाने तथा उनके उचित छिड़काव की विस्तृत ट्रेनिंग दी। कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दिव्येंदु दास ने सभी अतिथियों, जनप्रतितिधियों और अंचल से आए भारी संख्या में किसानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

