Chhattisgarh Liquor Scam: शराब घोटाले में 9.06 करोड़ की संपत्ति अटैच, राजीव भवन तक 880 करोड़ रुपये पहुंचने का ED का दावा…NV News
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NV News रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। इससे पहले 8 अक्टूबर को रायपुर स्थित उनकी दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश जारी किया गया था। इन संपत्तियों की कीमत 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है। रामगोपाल अग्रवाल को इस मामले में 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई का आरोप
ED की जांच रायपुर की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इस मामले में अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच कथित शराब सिंडिकेट ने आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) पर नियंत्रण स्थापित कर अवैध गतिविधियों के जरिए 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय जुटाई।
जांच में कथित घोटाले के तीन प्रमुख तरीकों का उल्लेख किया गया है। इनमें देशी शराब की आपूर्ति से जुड़ी अनियमितताएं, नकली होलोग्राम वाली शराब की सरकारी दुकानों के माध्यम से बिना हिसाब-किताब बिक्री और डिस्टिलर्स से कथित वार्षिक कमीशन की वसूली शामिल है। इसके अलावा विदेशी शराब की बिक्री के लिए FL-10A लाइसेंस व्यवस्था के माध्यम से अवैध कमीशन अर्जित करने का भी आरोप है।
राजीव भवन तक नकदी पहुंचाने का ED ने बताया तरीका
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट से अर्जित नकदी का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के पास रखा जाता था। ED का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह नकदी रायपुर के शंकर नगर स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय, राजीव भवन तक पहुंचाई जाती थी।
एजेंसी के मुताबिक, सिंडिकेट से जुड़े लोग नकदी लेकर राजीव भवन पहुंचते थे और वहां रामगोपाल अग्रवाल के अधीन काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र दादसेना को सौंपते थे। ED का दावा है कि इस माध्यम से शराब घोटाले से जुड़ी लगभग 860 से 880 करोड़ रुपये की नकदी पहुंचाई गई थी।
72 करोड़ रुपये पर नियंत्रण होने का आरोप
ED की जांच के अनुसार, कथित नकदी में से लगभग 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में रहे। एजेंसी का आरोप है कि उनके निर्देश पर इस रकम को रखा गया, इस्तेमाल किया गया या वितरित किया गया।
जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई के समर्थन में कथित सिंडिकेट के डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों का हवाला दिया है। ED के अनुसार, ये साक्ष्य नकदी के कथित लेन-देन और उसमें रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की जांच में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, ये एजेंसी के आरोप हैं और मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
अनुपम नगर और कटोरा तालाब के दो फ्लैट अटैच
ED ने रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित रामगोपाल अग्रवाल के दो फ्लैटों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन दोनों संपत्तियों की कुल कीमत 9.06 करोड़ रुपये बताई गई है। एजेंसी ने कथित अपराध से अर्जित आय से संबंधित संपत्ति मानते हुए इनके खिलाफ यह कार्रवाई की है।
संपत्ति अटैचमेंट का उद्देश्य जांच के दौरान कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों को सुरक्षित करना है। इस मामले में संपत्तियों पर अंतिम कानूनी निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
पहले भी कई लोगों की गिरफ्तारी और संपत्तियों पर कार्रवाई
ED के मुताबिक, इस मामले में रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पहले एक अभियोजन शिकायत और छह पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं। एजेंसी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है।
जांच के दौरान इससे पहले 601.28 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की गई थीं। रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी 9.06 करोड़ रुपये की नई संपत्ति अटैच किए जाने के बाद एजेंसी के अनुसार, कुल कार्रवाई की राशि बढ़कर लगभग 610.34 करोड़ रुपये हो गई है।
अन्य लाभार्थियों की पहचान के लिए जांच जारी
ED ने कहा है कि कथित शराब घोटाले से अर्जित धन का लाभ उठाने वाले अन्य लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी है। एजेंसी नकदी के कथित लेन-देन, संपत्तियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।

