Agri Revolution: न छोड़ मूंगफली की खेती अपना रहे किसान; कम पानी और कम लागत में हो रहा तगड़ा मुनाफा…NV News
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NV News रायपुर/महासमुंद, 18 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कृषि विभाग के मैदानी प्रयासों और प्रोत्साहन से किसान अब पारंपरिक धान की खेती के चक्र से बाहर निकलकर अधिक लाभ देने वाली वैकल्पिक फसलों की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। जिले में खरीफ मौसम के दौरान जल संरक्षण और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी सकारात्मक प्रयास के तहत महासमुंद जिले के लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इस बार मूंगफली की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है, जो किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित हो रही है।
बोंदानवापाली के दो किसानों ने पेश की नई मिसाल
कृषि विभाग के उपसंचालक एफ आर कश्यप ने बताया कि सरायपाली विकासखंड के ग्राम बोंदानवापाली के दो प्रगतिशील किसान इस बड़े कृषि बदलाव के मुख्य चेहरा बनकर उभरे हैं:
धान की जगह मूंगफली को चुना: राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (National Mission on Edible Oils) के अंतर्गत ग्राम बोंदानवापाली निवासी किसान फागू लाल कैवर्त और नंदकुमार कैवर्त ने अपनी कृषि भूमि के स्वरूप को बदला। दोनों ने 1 जुलाई 2026 को अपने-अपने 0.40-0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में धान के बजाय उन्नत किस्म की मूंगफली की बुवाई की।
वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल: कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में इन किसानों ने कतारबद्ध बुवाई और आधुनिक वैज्ञानिक विधियों को अपनाया है, जिससे वर्तमान में फसल की स्थिति बेहद शानदार है और बंपर पैदावार की उम्मीद है।
कम पानी, कम लागत और मिट्टी की सेहत में सुधार
परंपरागत धान की खेती को छोड़कर तिलहन की ओर रुख करने के पीछे किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक कारण साझा किए हैं:
वैकल्पिक फसलों के तीन बड़े फायदे:
जल संरक्षण: मूंगफली की फसल को धान की तुलना में बहुत कम सिंचाई और पानी की आवश्यकता होती है, जिससे भूजल का दोहन रुकता है।
बचत और अधिक मुनाफा: इसकी खेती में खाद, बीज और मजदूरी की लागत धान के मुकाबले काफी कम आती है, जिससे शुद्ध लाभ का मार्जिन बढ़ जाता है।
मिट्टी की उर्वरता: मूंगफली जैसी तिलहनी और फलीदार फसलें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में फिक्स करती हैं, जिससे खेत की मिट्टी की गुणवत्ता स्वतः ही सुधर जाती है।
क्षेत्र के अन्य किसान भी अब फागू लाल और नंदकुमार के खेतों का मुआयना कर मूंगफली की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक संख्या में किसान इस जलवायु अनुकूल (Climate-Resilient) मॉडल को अपनाते हैं, तो छत्तीसगढ़ की खेती अधिक टिकाऊ और मुनाफे का सौदा बनेगी।

