कोचिंग डिपो ने विकसित किया स्वदेशी ‘रेन वाटर इन्ग्रेस टेस्ट बेंच’; अब सफर में नहीं टपकेंगे ट्रेन के कोच…NV News

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NV News बिलासपुर, 10 जुलाई 2026। भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों के सफर को अधिक आरामदायक और बाधारहित बनाने की दिशा में एक शानदार तकनीकी नवाचार (Innovation) किया है। हाल ही में बिलासपुर-बीकानेर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी (First AC) कोच में छत से पानी टपकने का एक गंभीर मामला सामने आया था, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई थी। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर रेल मंडल के बिलासपुर कोचिंग डिपो ने कोचों में बारिश के दिनों में होने वाली लीकेज और पानी रिसने की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक पूरी तरह स्वदेशी सिस्टम विकसित कर लिया है।

डिपो में स्थापित किए गए इस अत्याधुनिक ‘रेन वाटर इन्ग्रेस टेस्ट बेंच’ (Rain Water Ingress Test Bench) के जरिए अब रेलवे अधिकारी बिना वास्तविक बारिश के भी हर एक कोच की बारीकी से जांच कर सकेंगे।

कृत्रिम बारिश से होगी हर कोच की अग्निपरीक्षा

इस नए स्वदेशी सिस्टम के आ जाने से अब ट्रेनों के रखरखाव और उनकी फिटनेस जांच की प्रक्रिया बेहद आधुनिक हो गई है:

बिना मानसून के होगी टेस्टिंग: ‘रेन वाटर इन्ग्रेस टेस्ट बेंच’ एक ऐसा सेटअप है जो कोच के ऊपर अत्यधिक दबाव के साथ पानी की बौछारें मारकर कृत्रिम रूप से भारी बारिश जैसी स्थिति पैदा करता है। इससे बिना मानसून सीजन के भी कोच की वाटरप्रूफिंग क्षमता का पता चल जाता है।

डिपो में ही होगा तत्काल सुधार: इस कड़े परीक्षण के दौरान कोच के भीतर जहाँ भी पानी रिसने या सीपेज की थोड़ी सी भी आशंका या सुराख दिखाई देगा, डिपो के तकनीकी कर्मचारी तुरंत उसकी मरम्मत (रिपेयरिंग) कर उसे पूरी तरह दुरुस्त करेंगे।

इस पूरी प्रक्रिया से शत-प्रतिशत संतुष्ट होने और कोच को पूरी तरह ‘लीक-प्रूफ’ प्रमाणित करने के बाद ही उसे यात्रियों की सेवा में मुख्य ट्रैक पर रवाना किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी टपकती छतों से परमानेंट मुक्ति

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से न केवल ट्रेनों के वातानुकूलित (AC) और स्लीपर कोचों के भीतर होने वाली पानी टपकने की अप्रिय घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगेगी, बल्कि कोच के भीतर लगे महंगे इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स और वायरिंग भी शॉर्ट-सर्किट के खतरे से सुरक्षित रहेंगे। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल की इस अनूठी पहल को अब भारतीय रेलवे के अन्य प्रमुख डिपो में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि देश के किसी भी कोने में रेल यात्रियों को मानसून के दौरान ऐसी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

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