छत्तीसगढ़ का सोठी आश्रम बना देश के लिए मिसाल: CM साय ने किया दौरा, बोले- “कुष्ठ रोगियों की सेवा और आत्मनिर्भरता का यह मॉडल समाज के लिए प्रेरणा”…NV News
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जांजगीर-चांपा/रायपुर, 3 जुलाई 2026। भारत में चिकित्सा विज्ञान की प्रगति से कुष्ठ रोग (Leprosy) के मामलों में तो लगातार कमी आई है, लेकिन इस बीमारी से ठीक हुए लोगों से जुड़ा सामाजिक कलंक (Social Stigma) और उनके सम्मानजनक पुनर्वास की चुनौती आज भी देश के सामने एक बड़ी समस्या है। ऐसे संवेदनशील समय में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) में संचालित ‘भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम’ पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मिसाल बनकर उभरा है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हाल ही में इस सेवाश्रम का दौरा किया। आश्रम की अद्वितीय व्यवस्थाओं को देखने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे देश का एक सर्वश्रेष्ठ मॉडल बताते हुए कहा कि यह संस्थान पीड़ित मानवता की सेवा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पूरे समाज के लिए एक महान प्रेरणा है।
इलाज के साथ आजीविका और सम्मान: सोठी आश्रम का अनूठा मॉडल
आमतौर पर कुष्ठ रोगियों या इस बीमारी से उबर चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन सोठी का यह आश्रम रोगियों को केवल चिकित्सकीय उपचार प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके संपूर्ण जीवन को बदलने का काम कर रहा है। आश्रम में मुख्य रूप से चार स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है:
आश्रय और स्नेह: यहां आने वाले प्रभावित लोगों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और पारिवारिक परिवेश उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे मानसिक तनाव और सामाजिक उपेक्षा के दंश से बाहर निकल सकें।
मुकम्मल पुनर्वास: कुष्ठ रोग से मुक्त हो चुके व्यक्तियों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए उनके शारीरिक और सामाजिक पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था है।
कौशल प्रशिक्षण (Skill Training): आश्रम के भीतर ही विस्थापित और ठीक हो चुके लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार विभिन्न विधाओं में हुनरमंद बनाया जा रहा है।
आत्मनिर्भर जीवन: प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये लोग आश्रम परिसर और उसके माध्यम से आजीविका से जुड़ रहे हैं, जिससे वे किसी पर बोझ बनने के बजाय खुद स्वावलंबी बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने की सेवाओं की सराहना
सोठी आश्रम के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वहां रह रहे लोगों से आत्मीय मुलाकात की और संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री साय ने आश्रम के प्रबंधन और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाते हुए कहा कि:
“कुष्ठ पीड़ितों को केवल दवाई की नहीं, बल्कि समाज के अपनेपन और सम्मान की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, सोठी ने सेवा, समर्पण और पुनर्वास का जो अभिनव मॉडल खड़ा किया है, वह यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति हो तो हम किसी भी सामाजिक चुनौती को अवसरों में बदल सकते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार इस सेवा अनुष्ठान को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
देशभर के लिए मार्गदर्शक बना संस्थान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि देश के अन्य राज्यों को भी कुष्ठ उन्मूलन के बाद के पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए जांजगीर के इस ‘सोठी मॉडल’ का अध्ययन करना चाहिए। जब तक प्रभावित लोगों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और कुशल नहीं बनाया जाएगा, तब तक उन्हें सामाजिक कलंक से पूरी तरह मुक्ति दिलाना संभव नहीं है। इस दिशा में सोठी आश्रम की यह पहल आदिवासी बहुल और ग्रामीण अंचलों के लिए एक नई किरण साबित हो रही है।

