Scam News:- भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाला: फर्जी नामांतरण कर करोड़ों की हेराफेरी, ग्रामीण बयान दर्ज कराने पहुंचे ईओडब्ल्यू दफ्तर…NV News
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NV News- देश की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना ‘भारतमाला प्रोजेक्ट’ (Bharatmala Project) एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में आ गई है। छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के तहत चल रहे जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में गड़बड़ी का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब नया मामला धमतरी जिले के ग्राम सिवनीकला से सामने आया है, जहां जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस कथित घोटाले से आक्रोशित होकर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्र के प्रभावित किसानों व ग्रामीणों ने सीधे आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का दरवाजा खटखटाया है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार को धमतरी जिले के सिवनीकला गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान सामूहिक रूप से अपनी शिकायत पर आधिकारिक बयान दर्ज कराने के लिए राजधानी रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू और एसीबी के मुख्य कार्यालय पहुंचे। जांच एजेंसी के आला अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर ग्रामीणों ने अपने बयान दर्ज कराए और इस पूरे सिंडिकेट में शामिल स्थानीय राजस्व अधिकारियों, दलालों और फर्जी भू-स्वामियों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की। ग्रामीणों ने जांच दल को कई ऐसे पुख्ता दस्तावेज और खसरा विवरण भी सौंपे हैं, जो प्रथम दृष्टया बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।
जांच एजेंसी को सौंपे गए शिकायती पत्र और बयानों में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भारतमाला परियोजना के मार्ग में आने वाली बेशकीमती जमीनों का नियमों को ताक पर रखकर फर्जी नामांतरण (म्यूटेशन) और अवैध रूप से बंटवारा किया गया है। इस जालसाजी का मुख्य उद्देश्य सरकार से मिलने वाले करोड़ों रुपये के मुआवजे की राशि को हड़पना और आपस में बंदरबांट करना था। शिकायत में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि सुनियोजित साजिश के तहत गांव के महज 17 से 18 मूल खसरा नंबरों को कागजों पर हेरफेर करके करीब 90 छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया। इस फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर उन लोगों को भी मुआवजे की भारी-भरकम पात्रता दिला दी गई, जिनका उस जमीन से कोई वास्तविक वास्ता ही नहीं था।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे खेल में स्थानीय पटवारी, तहसीलदार और जिला प्रशासन के भू-अभिषेक शाखा से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, जिन्होंने मोटी कमिशनखोरी के चक्कर में बिना जमीनी सत्यापन के रातों-रात जमीनों के रिकॉर्ड बदल दिए। इस वजह से जहां एक ओर वास्तविक और हकदार गरीब किसान अपने उचित मुआवजे के लिए कलेक्टोरेट और दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रसूखदार और अपात्र लोग करोड़ों रुपये की सरकारी राशि डकार गए। ईओडब्ल्यू और एसीबी के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि बयानों और दस्तावेजों के आधार पर धमतरी जिले के संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की बारीकी से स्क्रूटनी की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

