Environment News:- पराली जलाने पर प्रशासन का कड़ा रुख: पांच किसानों पर लगा 5-5 हजार रुपये का जुर्माना…NV News
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NV News- छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने की दिशा में धमतरी जिला प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और नजीर पेश करने वाला कदम उठाया है। राज्य के इतिहास में संभवतः पहली बार, खेतों में फसल के अवशेष यानी पराली (नरवाई) जलाने के मामले में प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में जिला प्रशासन ने पांच स्थानीय किसानों को दोषी पाया है। इन सभी दोषी किसानों पर कानूनन बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी-भरकम अर्थदंड (जुर्माना) थमा दिया गया है।
यह पूरा मामला धमतरी शहर के बागतराई रोड पर स्थित नगर पालिक निगम के ‘लिगेसी वेस्ट प्लांट’ (कचरा डंपिंग यार्ड) से जुड़ा हुआ है। पिछले दिनों इस लिगेसी वेस्ट प्लांट में अचानक भीषण आग लग गई थी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया था। इस आगजनी के कारण उठने वाले जहरीले धुएं से पूरे धमतरी शहर और आस-पास के रिहायशी इलाकों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था, जिससे नागरिकों को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर और जिला प्रशासन ने आग के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया था।
जांच टीम की विस्तृत रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि वेस्ट प्लांट के आस-पास स्थित कृषि हौद और खेतों में कुछ किसानों द्वारा अपनी धान की फसल कटाई के बाद बची हुई पराली में अंधाधुंध तरीके से आग लगा दी गई थी। खेतों से भड़की यही आग तेज हवाओं के कारण फैलती हुई सीधे नगर निगम के लिगेसी वेस्ट प्लांट तक पहुंच गई और वहां रखे टनों कचरे को अपनी चपेट में ले लिया। जांच में लापरवाही और नियमों की अवहेलना पूरी तरह सिद्ध होने के बाद, प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बागतराई क्षेत्र के पांच संबंधित किसानों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) के तहत 5-5 हजार रुपये का तगड़ा अर्थदंड आरोपित कर दिया है।
इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने संयुक्त रूप से धमतरी सहित पूरे अंचल के किसानों के लिए एक सख्त चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि खेतों में पराली या नरवाई जलाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है और इससे न केवल पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचती है, बल्कि भूमि की उपजाऊ क्षमता (मित्र कीट) भी नष्ट हो जाती है। प्रशासन ने किसानों से पराली को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक कतरन कर खाद बनाने या गौठानों में दान करने की अपील की है। साथ ही सचेत किया है कि भविष्य में यदि कोई भी किसान खेतों में आग लगाते पाया गया, तो उस पर न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।

