SCHOOL REFORM : छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में SMDC खत्म; अब 12वीं तक केवल SMC संभालेगी कमान, जारी आदेश से जानें क्या-क्या बदलेगा!…NV News
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NV News, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था में राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा और युगांतकारी बदलाव किया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक नए और कड़े आधिकारिक आदेश के तहत अब प्रदेश के हाई (High) और हायर सेकेंडरी (Higher Secondary) स्कूलों में बरसों से चली आ रही ‘विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति’ (SMDC – School Management and Development Committee) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक केवल एक ही समिति—’विद्यालय प्रबंधन समिति’ (SMC – School Management Committee) का गठन किया जाएगा। अब तक एसएमसी केवल प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक (कक्षा 1 से 8वीं) स्तर तक ही सीमित थी, लेकिन अब हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के संचालन और विकास की पूरी वित्तीय कमान भी इसी एकल समिति (SMC) के हाथों में होगी।
नए आदेश से क्या-क्या बदल जाएगा? (The New SMC Matrix)
स्कूल शिक्षा विभाग के इस बड़े फैसले से जमीनी स्तर पर स्कूल प्रबंधन में कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक और वित्तीय बदलाव देखने को मिलेंगे:
खत्म होगी दोहरी व्यवस्था: पहले एक ही परिसर या अलग-अलग स्तर पर SMC और SMDC दो अलग-अलग समितियां होने से समन्वय और निर्णयों में टकराव व देरी होती थी। अब कक्षा 1 से 12वीं तक एक ही समिति होने से ‘वन स्कूल, वन मैनेजमेंट’ का फार्मूला लागू होगा।
वित्तीय कमान और पॉवर्स: नई गाइडलाइन के अनुसार, अब कक्षा 12वीं तक की इस विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के पास स्कूल संचालन से जुड़े तमाम फैसलों के साथ-साथ ₹1 लाख तक के निर्माण व मरम्मत कार्यों की सीधी वित्तीय कमान होगी। ₹1 लाख तक के खर्च के लिए समिति खुद निर्णय ले सकेगी।
पालकों की बढ़ेगी भागीदारी: SMC में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पालकों (माता-पिता) की संख्या और भागीदारी अधिक होती है। ऐसे में अब बड़े स्कूलों (9वीं से 12वीं) के विकास कार्यों और बजट खर्च में भी पालकों का सीधा नियंत्रण और पारदर्शिता रहेगी।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
सूत्रों और विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के अधोसंरचना विकास और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले फंड (जैसे शाला विकास कोष, आकस्मिक निधि व अन्य सरकारी ग्रांट) के उपयोग में होने वाली प्रशासनिक लेटलतीफ़ी और जटिलताओं को कम करना है। बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने और नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही सभी हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में पुरानी कमेटियों को भंग कर नई ‘SMC’ का गठन कड़ाई से सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

